रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर 12 साल पहले हुए आतंकी हमले में शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। इस मामले में कुंडा के आजाद नगर निवासी कौसर फारूकी को भी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वालों का मददगार ठहराते हुए जेल भेजा गया था। जिसे कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया। यह खबर सुनने के बाद पहले तो किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था। लोग मीडिया वालों से बात करने से भागते रहे। कुछ लोगों ने परिजनों का हौसला बढ़ाया तो उनके आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे। चारपाई पर पड़े कौसर के अब्बू अल्लाह का शुक्रिया अदा करने लगे। हालांकि कौसर के मकान पर ताला लटक रहा था।
रामपुर के सीआरपीएफ कैंप पर 31 सितंबर 2007 को आतंकी हमला हुआ था। इस मामले की जांच कर रही एटीएस ने कुंडा कोतवाली के आजाद नगर सरजू नगर निवासी कौशर फारूकी पुत्र अब्दुल जब्बार को कुछ दिनों बाद इलेक्ट्रानिक्स की दुकान से उठा ले गई। बाद में उसके ऊपर आतंकियों की मदद करने का आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया। तब से वह जेल में ही बंद था। शुक्रवार को रामपुर रामपुर जनपद न्यायालय में एडीजे तृतीय ने फैसला सुनाया। जिसमे कौसर को दोषमुक्त घोषित कर दिया गया। इस खबर से परिजन अंजान थे।
आजाद नगर में दो स्थानों पर कौसर का परिवार रहता है। हालांकि कौसर के मकान पर ताला बंद था। एक मकान में उनके बुजुर्ग अब्बू चारपाई पर थे। उन्हें भी कोर्ट के फैसले की जानकारी नहीं थी। कौसर का भाई अफसर फारूकी अपने जूते चप्पल की दुकान पर थे। इस बात की जानकारी पड़ोसी राधेकृष्ण शुक्ल को हुई तो वह खुशी से चहक उठे। वह अफसर के पास पहुंचे। कौशर के दोषमुक्त होने की खबर अफसर को भी नहीं थी। सउदी अरब में रहने वाला भाई सरवर कुछ दिनों पहले घर आया है। वह फैसले की जानकारी के चलते रामपुर गया था।
कौसर की बीवी सलमा और बच्चे फैसल, कायनाम और फहद भी नहीं थे। आतंकी हमला करने वालों के मददगार का कलंक झेल रहे कौसर के परिवार वालों के लिए शुक्रवार को दिन खुशी की सौगात लेकर आया। बुजुर्ग अब्बू चारपाई पर ही आंखों में अश्क लिए अल्लाह का शुक्र अदा करते रहे। भाई अफसर व पड़ोसी राधे कृष्ण शुक्ल ने कहा कि उन लोगों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। कौसर के ऊपर लगे कलंक से पूरा परिवार हमेशा डरा रहता था। आज भी कोई इस मामले में मुंह खोलने को तैयार नहीं था।
बहुत कुरेदने पर अफसर बोले कि अल्लाह का लाख-लाख शुक्र है कि उनके परिवार के ऊपर लगा बदनुमा धब्बा आज मिट गया। पड़ोसी राधे कृष्ण बोल पड़े कि उन्हें पूरा भरोसा था कि सउदी अरब से लौटकर घर आया कौसर ऐसा कोई काम नहीं किया है। उन्हें ईश्वर व न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उनके पड़ोसी बेगुनाह हैं। फिलहाल परिवार के लोगों को जब अमर उजाला की टीम से यह खबर मिली तो उनके आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे।
पड़ोसी भी पहले बात करने से काट रहे थे कन्नी
कौसर फारूकी के पड़ोसी भी मीडिया से बात करने से कन्नी काट रहे थे। हालांकि जब पड़ोस के एक किशोर को इस बात की जानकारी हुई तो वह खुश होकर अपनी मां से बोल पड़ा कि फैसल के अब्बू अब घर आ जाएंगे। उन्हें कोर्ट ने निर्दोष माना है। हालांकि पड़ोस के लोग कौसर की बाबत खुलकर बोलने से कतराते नजर आए। राधेकृष्ण जैसे पड़ोसी के आने के बाद परिजनों का हौसला बढ़ा।
प्रतापगढ़ कुंडा कस्बे के सरयू नगर मोहल्ले में मोहम्मद कौशर के बरी होने पर खुश भाई।- फोटो : PRATAPGARH