बेसिक शिक्षा विभाग के पूर्व माध्यमिक स्कूलों में डेस्क-बेंच सप्लाई में मनमानी की गई। जिले के 140 स्कूलों में 35 सेट डेस्क-बेंच मुहैया कराने के लिए शासन ने 1.40 लाख रुपये प्रति स्कूल की दर से भुगतान करने के लिए धनराशि मुहैया कराई है। बीएसए ने घटिया डेस्क-बेंच सप्लाई की जानकारी होते ही भुगतान पर रोक लगाकर गुणवत्ता जांचने के आदेश दिए हैं।
जिले में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में पुस्तक और खेल सामग्री खरीद में व्यापक अनियमितता मिलने के बाद अब डेस्क-बेंच सप्लाई में मनमानी उजागर हुई है। डेस्क-बेंच इतने घटिया हैं कि स्कूल पहुंचते ही हेडमास्टरों ने शिकायत शुरू कर दी। अधिकांश स्कूलों में 35 के बजाए 30 सेट ही दिए गए हैं। शासन ने जिले के 140 मिडिल स्कूलों का चयन कर बच्चों को डेस्क-बेंच मुहैया कराने का फैसला लिया था।
प्रति स्कूल 35-35 सेट डेस्क-बेंच सप्लाई के लिए 1.40 लाख रुपये की दर से 1.96 करोड़ रुपये मुहैया कराए हैं। शहर के एक चर्चित ठेकेदार को टेंडर दिया गया। ठेकेदार ने मानक की धज्जियां उड़ाते हुए घटिया डेस्क-बेंच स्कूलों में पहुंचा दिया। इधर हेडमास्टरों के माध्यम से बीएसए को जानकारी मिली कि डेस्क-बेंच मानक के विपरीत हैं। इस पर बीएसए ने भुगतान पर रोक लगाते हुए 140 स्कूलों में जांच के लिए टीम का गठन किया है।
दान देने का बंद हुआ सिलसिला
जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में अभी तक नेता और समाजसेवी बच्चों को बैठने के लिए डेस्क-बेंच दान में देते थे। मगर यह सिलसिला अब बंद हो गया है। विभाग ने थोड़े-थोड़े स्कूलों का चयन करके अब डेस्क-बेंच मुहैया कराने की पहल तेज कर दी है।
स्कूलों में मानक के विपरीत डेस्क-बेंच सप्लाई की जानकारी मिलने पर बीईओ से जांच करने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कार्यदायी संस्था को भुगतान किया जाएगा।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए