लोकसभा चुनाव में तीसरी बार कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह और जनसत्ता दल के अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी आमने सामने होंगे। विधानसभा में अशोक को शिकस्त देने वाले सदर विधायक बने संगमलाल गुप्ता एक बार फिर लोकसभा के चुनावी दंगल में एक दूसरे का आमना सामना करेंगे।
लोकसभा नामांकन प्रक्रिया मंगलवार से प्रारंभ हो गई। लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे प्रत्याशी एक दूसरे के लिए अजनबी नहीं है। इसके पहले भी सभी प्रत्याशी चुनावी दंगल में आमना सामना कर चुके हैं। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह और सपा प्रत्याशी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के बीच मुकाबला हो चुका है।
इस चुनाव में गोपालजी को जीत हासिल हुई थी। हालांकि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह व सपा सांसद गोपालजी के बीच मुकाबला हुआ। जिसमे कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह को जीत हासिल हुई थी। 2014 में कांग्रेस ने रत्ना सिंह को मैदान में उतारा लेकिन सपा से गोपालजी के स्थान पर प्रमोद पटेल को प्रत्याशी बनाया गया था।
कांग्रेस की रत्ना सिंह इस बार मैदान में हैं तो सपा छोड़कर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से चुनावी समर में कूदे अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी एक बार चुनावी दंगल में कूद पड़े हैं। वहीं दूसरी ओर सपा-बसपा व रालोद गठबंधन प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी फिर मैदान में हैं। वह 2017 के विधानसभा चुनाव में सदर विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं।
उनका मुकाबला सपा के नागेंद्र सिंह मुन्ना और भाजपा-अद गठबंधन के प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता से था। संगमलाल गुप्ता ने सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह मुन्ना यादव व बसपा प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी को हराया था। एक बार फिर संगमलाल गुप्ता व अशोक त्रिपाठी लोकसभा के चुनावी दंगल में एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं।