रेलवे ट्रैक चेकिंग में घोर लापरवाही बरती जा रही है। ट्रैक के नट-बोल्ट जगह-जगह ढीले हैं। उनको कसने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। सोमवार की रात को इलाहाबाद और वाराणसी रेल खंड की पेट्रोलिंग कर रही आरपीएफ की टीम की जांच में एक किलोमीटर तक इसका खुलासा होने पर हड़कंप मचा हुआ है। आरपीएफ प्रभारी ने इस बारे में संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया है। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। एक तरफ अराजकतत्व ट्रैक को निशाने पर लेकर बार-बार साजिश रच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इंजीनियरिंग विभाग के लोग इस तरह की लापरवाही करके उनको साजिश में सफल होने का पूरा मौका दे रहे हैं।
इलाहाबाद रेल खंड पर दो बार ट्रैक को नुकसान पहुंचाकर ट्रेन हादसे को अंजाम देने की असफल साजिश हुई। मगर गनीमत थी कि दोनो ही बार हादसा टल गया। इसके बाद भी जिम्मेदार नहीं संभले। पूरे ट्रैक की पड़ताल कराने की जरूरत नहीं समझी गई। यही वजह है कि बीच में ट्रैक प्लेट और नट बोल्ट गायब की खबरें मिलती रहीं। इंजीनियरिंग विभाग की शिकायत पर आरपीएफ ने वाराणसी और इलाहाबाद रेल खंड पर ट्रैक की सुरक्षा बढ़ा दी है। सोमवार की रात को इलाहाबाद और वाराणसी रेल खंड पर आउटर के भीतर पेट्रोलिंग कर रही आरपीएफ की टीम को जगह-जगह नट बोल्ट ढीले मिले। एक किलोमीटर की दूरी में ऐसा कई स्थानों पर मिला। चोरी की आशंका से हक्का-बक्का सिपाहियों ने पहले तो ढीले नट-बोल्ट कसना शुरू कर दिया। मगर जब कई जगह ऐसा मिला तो उन्होंने इसकी सूचना फौरन आरपीएफ प्रभारी इंस्पेक्टर एपी यादव को दी। एपी यादव ने सिपाहियों से कहा कि वे ट्रैक की निगरानी करते रहें। अगर कोई अराजकतत्व दिखाई देता है तो उसको पकड़ लिया जाए। उन्होंने इस बारे में इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों को अवगत करा दिया। उनका कहना था कि पेट्रोलिंग में सिपाहियों को ट्रैक के नट बोल्ट कई जगह ढीले मिले हैं। उनको कसवाने की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों की है। एडीईएन अर्जुन सिंह का कहना है कि ऐसा होना नहीं चाहिए फिर भी मामले की जांच कराई जा रही है।