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प्रतापगढ़: होम आइसोलेशन मेें मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ रहे अफसर

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शासन से कोरोना मरीजों को होम आइसोलेशन में रखने की अनुमति मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मौज है। ज्यादा से ज्यादा पॉजिटिव मरीजों को वह होम आइसोलेट कर दे रहे हैं। इसके बाद उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
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होम आइसोलेशन में रखे जाने वाले मरीजों से हर दिन फोनकर उसके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली जानी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास इसकी फुर्सत नहीं है। इतना ही नहीं, उन्हें मेडिकल किट भी नहीं खरीदकर नहीं दी जा रही है। स्वास्थ्यकर्मी शुरुआत में एक बार होम आइसोलेशन एप डाउनलोड कराने के बाद मरीजों की खोजखबर नहीं लेते हैं।
होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को पहले मेडिकल किट खरीदने के लिए निर्देश हैं। जिसमें पीपीई किट, मॉस्क, पल्स आक्सीमीटर, डिजिटल थर्मामीटर व सैनिटाइजर के साथ जिंक व विटामिन सी की टेबलेट होती हैं।
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दूसरी शर्त यह है कि पीड़ित को पहले से कोई दूसरी बीमारी न हो। संबंधित डॉक्टर को संक्रमित मरीज से सुबह व शाम को उसकी तबीयत, तापमान और पल्स की जानकारी लेकर दवा खाने का सुझाव देना था। जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेट करने की परिभाषा ही बदलकर रख दी है। नियमों को दरकिनार कर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेेदारों ने होम आइसोलेट मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ रखा है। मरीजों से न तो कंट्रोलरूम के स्वास्थ्यकर्मी हालचाल पूछ रहे हैं और न ही डाक्टर।
शहर के अष्टभुजानगर निवासी सोनूू मोदनवाल संक्रमित होने के बाद घर पर ही रहा। उसे केवल कंट्रोलरूम से मोबाइल पर एप लोड करने के लिए कहा गया। इसके बाद दोबारा उसे किसी ने फोन नहीं किया। कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर कितने गंभीर है इसका नजारा तीन दिन पहले डीएम के सीएमओ आफिस में बने कोविड कंट्रोलरूम के निरीक्षण के दौरान देखने को मिला था।
डीएम के मांगने पर अफसर होम आइसोलशन में रखे गए मरीजों की सूची तक नहीं दिखा सके थे। इस पर जिलाधिकारी ने सीएमओ को फटकार तक लगाई थी। इसके बाद भी लापरवाही जारी है। जिले में पखवाडे़े भर से हर दिन संक्रमितों की संख्या पचास के आसपास पहुंच रही है। जबकि, संत एंथोनी कॉलेज में बने कोविड अस्पताल में सप्ताह भर से 50 से लेकर 60 मरीजों को ही भर्ती दर्शाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर अपनी सिरदर्दी से बचने के लिए मरीजों को होम आइसोलेट करने का फंडा अपनाए हुए हैं।
अपडेट नहीं की जाती है होम आइसोलेट होने वालों की जानकारी
स्वास्थ्य विभाग हर दिन शाम को कोविड -19 से संबंधित प्रेस रिलीज जारी करता है। जिसमें होम आइसोलेशन व कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या तो दर्शा दी जाती है। हर दिन कितने मरीज होम आइसोलेट हुए और कितनों को कोविड अस्पताल भेजा गया, इसका ब्योरा स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम के पास नहीं रहता। सोमवार को हर दिन होम आइसोलेट होने वाले संक्रमित मरीजों के बारे में पूछने पर डीपीएम राजशेखर ने बताया कि उन्हें कुल होम आइसोलेट मरीजों के बारे में पता है। हर दिन कितने मरीज घरों में रोके जा रहे हैं, इस बारे में जानकारी नहीं है।
इलाज के लिए गठित है डॉक्टरों की टीम
कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों की टीम गठित होने का दावा करता है, मगर ऐसा कहीं भी दिखाई नहीं पड़ता। अधिकांश संक्रमित मरीजों की शिकायत रहती है कि कभी-कभार एप लोड करने के लिए फोन आता है। कुछ दवाएं नजदीकी सीएचसी व पीएचसी से मंगाने के लिए बोल दिया जाता है। बिना मेडिकल किट के ही मरीज अपने घरों में रहते हैं। प्रभावशाली संक्रमित लोगों की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अलग मापदंड अपनाया जाता है।
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