कोरोना संक्रमण के दौरान हुए लॉकडाउन में दो महीने तक राजस्थान में फंसे रहने के बाद सरकार द्वारा छूट मिलने के बाद किसी भी तरह घर पहुंचने की जल्दी में नौ लोगों की जान चली गई। दो परिवार उजड़ गया। चालक को छोड़कर हादसे में मरे सभी लोग लॉकडाउन के बाद अपने घर बिहार और वाराणसी जा रहे थे।
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- फोटो : pratapgarh
पहले इन लोगों ने ट्रेन से जाने का प्लान बनाया था, लेकिन टिकट नहीं मिला। ऐसे में आननफानन में स्कार्पियो बुककर सभी घर के लिए रवाना हुए। प्रतापगढ़ जिले में प्रवेश करते ही हादसा हो गया।
बिहार प्रदेश के अरवल जिले के कोरियम गांव निवासी चितरंजन राजस्थान के अलवर के भिवानी में एक होटल में इलेक्ट्रीशियन था। वह अपनी पत्नी बिंदु और 12 साल की बेटी कोमल के साथ रहता था।
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एक बेटा और एक बेटी गांव में दादा-दादी के पास हैं। कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के बाद होटल बंद हो गया। ऐसे में चितरंजन और उसका परिवार वहीं फंस गया। वह बार-बार घर आने के लिए कहता रहा, लेकिन घरवाले उसे लॉकडाउन खुलने का इंतजार करने के लिए कहते रहे। लॉकडाउन के बाद सरकार द्वारा छूट देने और ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद उसने घर आने के लिए प्रयास किया, लेकिन टिकट नहीं मिला।
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इस पर उसने बिहार और वाराणसी के ही छह और लोगों के साथ मिलकर स्कार्पियो बुक की और परिवार के साथ घर आ रहा था। स्कार्पियो ड्राइवर हरियाणा निवासी धर्मेंद धारीवाल चला रहा था। घर पहुंचने की जल्दी में इन लोगों ने कहीं पर आराम नहीं किया।
यही कारण था कि नवाबगंज के वाजिदपुर में भोर में ड्राइवर को झपकी आ गई और स्कार्पियो सीधे ट्रक से भिड़ गई। अगर ड्राइवर ने कहीं रुककर आराम कर लिया होता तो शायद हादसा नहीं होता। हादसे की जानकारी मिलने के मृतकों के घरों में कोहराम मचा है।
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एंबुलेंस से घर भेज जाएंगे शव
जिला प्रशासन ने सभी शवों को घर भेजने की व्यवस्था बनाई है। इसके चलते उनके परिजनों को जिला अस्पताल का ही पता देकर बुलाया गया है। उधर, शाम को हादसे में घायल बंटी को नवाबगंज थाने लाया गया। इसके बाद एक सिपाही के साथ उसे भी जिला अस्पताल भेजा गया।
नवाबगंज के वाजिदपुर में हुई स्कार्पियो व ट्रक की भिड़ंत में नौ लोगों की मौत हो गई। मृतकों के बारे में विशेष जानकारी न हो पाने के कारण पुलिस अधीक्षक ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजने की बात कही थी। इसके साथ ही उनके शवों कों एम्बुलेंस से घर भेजने की भी बात कही थी।
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इसके लिए थानाध्यक्ष को भी उनके परिजनों से संपर्क होने पर जिला अस्पताल ही आने के लिए निर्देशित करने को कहा गया था। इसके चलते सभी शवों को गाड़ी से निकालने के बाद जिला अस्पताल भेजा गया।
इसके साथ ही उनके पास से मिले आइडेंटिटी कार्ड सहित अन्य सामान को भी जिले के लिए ही भेज दिया गया। यही नहीं मीडियाकर्मियों को भी पहचान और उनके नामों की जानकारी नहीं दी जा सकी। उधर शाम को घायल बंटी के नार्मल होने पर उसे नवाबगंज थाने लाया गया। इसके बाद उसे एक गाड़ी से जिला अस्पताल भेज दिया गया।