एचआईवी पाजिटिव होने का दंश झेल रही जिस महिला का आपरेशन करने से जिला अस्पताल के सर्जन ने इनकार कर दिया है, वह विधवा है। गांव में मेहनत-मजदूरी करके अपना और दो बच्चों का पेट पालनी वाली महिला को गरीबी रेखा से ऊपर वाला पीला कार्ड जारी किया गया है। जिससे उसको सरकारी कोटे की दुकान से राशन नहीं मिलता है। जबकि शासन ने एचआईवी पाजिटिव को चिह्नित करके उनका गरीबी रेखा से नीचे का कार्ड बनाने का निर्देश दिया है।
जिले में ऐसे न जाने कितने एचआईवी पाजिटिव मरीज हैं जिनका गरीबी रेखा से नीचे का कार्ड नहीं बना है। पाजिटिव महिला पिछले दो साल से पीएनपी संस्था से जुड़कर अपना इलाज करवा रही है। पता चला है कि इसका पति भी एचआईवी पाजिटिव था। बाद में उसका निधन हो गया। दोनों बच्चे बीमारी की गिरफ्त से दूर हैं। सरकारी राशन की दुकान से अनाज की सुविधा न होने से महिला को मेहनत-मजदूरी करके अपना और दोनो बच्चों का पेट पालना पड़ रहा है। संस्था के अध्यक्ष विनोद यादव का कहना है कि वे गरीबी के नीचे वाला कार्ड बनवाने के लिए कई बार डीएसओ व अन्य अधिकारियों से मिल चुके हैं। मगर अभी तक कार्ड नहीं बन सका है। महिला की माली हालत ठीक नहीं हैं। वह गांव में लोगों के यहां मेहनत-मजदूरी करके अपना और बच्चों का गुजर बसर करती है।