जिले के डेढ़ सौ प्रधानों के लिए खुशखबरी है। उनके गांव में जल्द ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राजकीय सस्ते गल्ले की दुकान खुलने वाली है। शासन का यह आदेश विभाग में पहुंच गया है और अप्रैल माह से कोटेदारों के चयन का अधिकार उन्हें मिलने जा रहा है। वर्ष 2015 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिले में 150 नई ग्राम पंचायतों का सृजन किया गया है। जिले में पहले ग्राम पंचायतों की संख्या 1105 हुआ करती थी, जो अब बढ़कर 1255 हो गई है। नई ग्राम पंचायतों को पूरी तरह मजबूत करने और उपभोक्ताओं को नियमित रूप से राशन वितरित करने के लिए सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें खोलने का फैसला लिया गया है।
ग्राम पंचायत में होने वाली खुली बैठक में कोटेदार का चयन किया जाएगा। पूर्व में शासन ने यह कहा था कि जिस गांव की आबादी चार हजार से अधिक होगी, उसी गांव में नई दुकानें खोली जाएंगी। इससे अधिकांश ग्राम पंचायतों में नई दुकानें खुलने पर संकट खड़ा हो गया था। प्रधानों की आवाज शासन तक पहुंचते ही जिले की नवसृजित सभी 150 ग्राम पंचायतों में नई दुकानें खोलनेे का निर्देश दिया गया है। इन दुकानों के खुल जाने से गांव के उपभोक्ताओं को दूसरे गांव में राशन और मिट्टी का तेल लेने के लिए नहीं जाना होगा। जिला पूर्ति अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि जिले की नवसृजित ग्राम पंचायतों में नई दुकानें खोलने के लिए शासन का आदेश आया है। जल्द ही प्रधानों को पत्र जारी कर गांव में खुली बैठक कराकर प्रस्ताव मांगा जाएगा।