प्रतिभा किसी परिचय का मोहताज नहीं होती है। इसीलिए दाउदपुर बाजार में चाय बेचने वाले बजरंगबहादुर यादव के बेटे तरुण कुमार यादव ने जब आईआईटी में 2929 वीं रैंक हासिल की तो पूरे इलाके में वह चर्चा का विषय बन गया। अनेक आर्थिक परेशानियों से जूझते हुए उसने इस कामयाबी के साथ काउंसिलिंग के दौरान बीएचयू जैसा संस्थान भी हासिल कर लिया लेकिन अब फीस के रूप में उसके सामने नया संकट आ खड़ा हुआ है। मेधावी तरुण को आठ जुलाई को काशी हिन्दू विश्व विद्यालय में प्रवेश लेना है, जिसके लिए उसे एक लाख पांच हजार रुपये की जरूरत है।
पट्टी इलाके के विनैका गांव का रहने वाला तरुण शुरू से ही पढ़ाई में काफी तेज रहा। गरीबी से लड़ रहे तरुण के पिता बजरंग बहादुर ने दाउदपुर बाजार में गुमटी में चाय की दुकान खोल रखी है। तरुण भी दुकान पर पिता का हाथ बंटाते हुए इस मुकाम तक पहुंचा है। अब आईआईटी की पढ़ाई के लिए फीस उसकी राह में रोड़ा बन रही है। आठ जुलाई को बीएचयू में प्रवेश के लिए उसे एक लाख पांच हजार रुपये की दरकार है। तमाम कोशिशों के बावजूद तरुण और उसके पिता के लिए यह राशि जुटाना संभव नहीं हो पा रहा है।
वैसे तो इससे पहले आईआईटी में सफलता पाने वाले जिले के चार होनहारों को मुख्यमंत्री से लेकर विधायकों तक ने मदद की, लेकिन दाउदपुर के मेधावी तरुण की ओर शासन-प्रशासन या राजनेताओं, किसी का ध्यान नहीं गया। सामाजिक सरोकारों को लेकर प्रतिबद्ध ‘अमर उजाला’ ने अपने पाठकों के सहयोग से मेधावी तरुण को उसके मुकाम तक पहुंचाने में सहयोग का संकल्प लिया है। इक्कीस हजार रुपये के योगदान के साथ ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ ने पहल की है, अब आपकी बारी है। आपकी मदद से उसके सपनों को पंख लग सकते हैं। तरुण को उसका मुकाम दिलाने में ‘अमर उजाला’ की मुहिम का हिस्सा बनें। आपका साथ मिलेगा तो तरुण को उसकी मंजिल मिलेगी। इसके लिए आप ‘अमर उजाला’ के इलाहाबाद या प्रतापगढ़ दफ्तरों में संपर्क कर सकते हैं।