बीमारी का बहाना बनाकर मौज करने वाले बंदियों पर अब शासन ने सख्ती बरतने की तैयारी कर ली है। जिले से बाहर बड़े अस्पतालों में रेफर करने के लिए पहले उनकी तीन डॉक्टरों का पैनल जांच करेगा। इसमें गंभीर बीमारी की पुष्टि होने पर ही उन्हें रेफर किया जाएगा। फर्जी तरीके से बीमारी बताकर जेल के अस्पताल से जिला और यहां से इलाहाबाद रेफर करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
जेलों में निरुद्ध बंद रसूखदार लोग आए दिन बीमारी का बहाना बनाकर बड़े अस्पतालों में पहुंच जाते हैं। जेल प्रशासन के साथ जेल के चिकित्सकों को मैनेज कर उनसे जिला अस्पताल के लिए रेफर करवा लेते हैं। यहां पहले से ही उनके गुर्गे खड़े रहते हैं। वह जिला अस्पताल के चिकित्सकों को मोटी रकम देकर इलाहाबाद या लखनऊ में बड़े अस्पतालों में पहुंच जाते हैं। इलाज के दौरान साथ में लगने वाले सुरक्षाकर्मियों को खिला पिलाकर बगल कर देते हैं। इसके बाद वे अस्पताल में ही अपना प्राइवेट काम निपटाने के साथ ही घर की तरह आराम फरमाते हैं। चिकित्सक छुट्टी करने की बात कहता है तो फिर से उसे मैनेज करने का प्रयास किया जाता है। इस तरह की शिकायतें मिलने के बाद शासन ने अब ऐसे बंदियों की नकेल कसने की तैयारी कर ली है।
जेलर के साथ सीएमओ व डीएम के पास शासनादेश आया है कि पहले जेल के चिकित्सक इलाज करेंगे। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल भेजा जाएगा। यहां तीन डॉक्टरों की टीम जांच करेंगी और भर्ती करके उपचार करेगी। हालत में सुधार न होने पर फिर से जांच करके इलाहाबाद रेफर किया जाएगा। मगर जांच रिपोर्ट की एक कॉपी डीएम व सीएमओ के साथ जेलर के पास भेजी जाएगी। पैनल के चिकित्सक अगर बंदी का स्वास्थ्य ठीक बता देते हैं तो बंदियों को अस्पताल भेजने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माह भर में दो से तीन बार पैनल के चिकित्सक जांच करेंगे और रिपोर्ट को अधिकारियों तक भेजेंगे। ऐसे में अब जेल से बाहर रहकर आराम फरमाने वाले बंदियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।