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परिषदीय स्कूलों के बच्चे भी सफाई में रहेंगे अव्वल

Sun, 19 Apr 2015 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
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देश में बह रही स्वच्छ भारत मिशन की बयार में बेसिक शिक्षा विभाग भी कदमताल करने को तैयार है। परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत लाखों बच्चों को गुरूजी अब स्वच्छता का पाठ पढ़ाएंगे और उनमें स्वच्छ आदतों को विकसित करने पर भी ध्यान देंगे। स्कूलों में नवीन मध्याह्न भोजन पंजिका को हाईजीन (स्वच्छता) माड्यूल पर तैयार किया है जिसमें बच्चों के साबुन से हाथ धोने से लेकर खुले में शौच करने तक के हानिकारक प्रभावों का सचित्र वर्णन किया गया है।
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शहर से गांवों तक में परिषदीय स्कूलों का जाल बिछा हुआ है। आमधारणा है कि समाज के गरीब तबके के बच्चों की शिक्षा इन्हीं स्कूलों में होती है। यह बच्चे साफ-सफाई के प्रति भी ज्यादा जागरूक नहीं होते हैं और न ही इनके अभिभावक स्वच्छता के प्रति अपने नौनिहालों को सचेत करते हैं। ऐसे में कुपोषण और अनेक संक्रामक बीमारियां भी इन बच्चों को बड़ी आसानी से अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने अब नवीन मध्याह्न भोजन पंजिका को हाईजीन माड्यूल पर तैयार कर बच्चों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। इसके लिए स्कूलों के अध्यापकों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होंगी। स्कूलों में बच्चों को दोपहर का पका-पकाया भोजन उपलब्ध कराया जाता है। भोजन की गुणवत्ता के बाद अब बच्चों को उसे उचित प्रकार से भोजन ग्रहण करने पर जोर दिया जा रहा है। भोजन पकाने वाले रसोइयों को भी स्वच्छता से भोजन तैयार करने की नसीहत दी गई है। भोजन करने से पूर्व बच्चों को साबुन से हाथ धोना होगा। साबुन से हाथ धोने का सही तरीका भी चित्र सहित पंजिका में अंकित किया गया है।

क्योंकि बिना हाथ धोए भोजन करने से अनेक बीमारियों के कीटाणु शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में बच्चों को दिया गया पौष्टिक भोजन व्यर्थ हो जाता है। साबुन से हाथ धोकर भोजन करने की आदत विकसित करने में गुरुजी अहम भूमिका निभाएंगे। पंजिका में प्रत्येक दिन हाथ धोकर भोजन करने वाले बच्चों की संख्या भी निर्धारित कालम में दर्ज करनी होगी। स्वच्छता और स्वास्थ्य के बीच घनिष्ठ संबंध है। इस बात को भी गुरूजी बच्चों को समय-समय पर बताएंगे और उन्हें आस-पास साफ-सफाई रखने पर बल देंगे। स्कूलों में बच्चों के पेयजल का स्त्रोत क्या है? यह भी पंजिका में दर्ज किया जाएगा। बच्चे जिस नल का पानी पीते हैं उसकी जांच भी कराई जाती है या नहीं? अब यह भी बताना पड़ेगा।
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हाईजीन माड्यूल पर तैयार पंजिका में खुले में शौच से होने वाले हानिकारक प्रभावों का भी सचित्र वर्णन किया गया है। परिषदीय स्कूलों में तैनात गुरूजी अब बच्चों को आसानी से स्वच्छ आदतों को विकसित कराने में मदद कर सकेंगे। कान्वेंट स्कूलों मेें बच्चों की साफ-सफाई पर इतना ध्यान दिया जाता है कि बच्चे स्वयं ही सफाई के प्रति सजग रहते हैं। यूनीफार्म हो या फिर हाथ के नाखून, सिर के बाल हों या फिर जूते की पालिश सब कुछ टिप-टाप रहता है। इसके विपरीत परिषदीय स्कूलों के बच्चे घर की वेशभूषा में बस्ता उठाकर स्कूल भी चले आते हैं।
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