जिले के 11,189 वित्तविहीन शिक्षकों के लिए खुशखबरी है। सरकार के नए फैसले से अब उन्हें दस हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने वित्तविहीन शिक्षकों की आवाज सुन ली है और इसे अंतिम रूप देने जा रही है।
जिले के मान्यता प्राप्त स्कूलों में तैनात शिक्षकों को अब दो और चार हजार रुपये पर नौकरी नहीं करनी होगी, बल्कि उन्हें सरकार ने मानदेय के तौर पर दस-दस हजार रुपये देने का फैसला किया है। समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल इस फैसले को अंतिम रूप देने में उसे चार साल लग गए। मानदेय भुगतान की मांग को लेकर सड़क पर उतरने वाले शिक्षकों ने सरकार को सिर्फ झकझोरा ही नहीं, बल्कि मानदेय जारी करने को भी मजबूर कर दिया।
बीते जनवरी माह में भी वित्तविहीन शिक्षकों ने विधानसभा घेराव करने की रणनीति बनाई थी, मगर किरकिरी से बचने के लिए सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में मानदेय भुगतान के लिए अनुपूरक बजट में शामिल करने के अपने फैसले से शिक्षक नेताओं को अवगत कराया था। फिलहाल सरकार के इस फैसले से वित्तविहीन शिक्षकों में खुशी है। मनरेगा कर्मियों से भी कम मानदेय पर बच्चों को संवारने की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों की नजरें अब मानदेय का भुगतान कैसे और कब होगा, इस पर टिक गई हैं। डीआईओएस शिव कुमार ओझा ने बताया कि विभाग को बजट और गाइडलाइन मिलने के बाद ही मानदेय भुगतान की सही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।