प्रतिबंध के बावजूद रेलकर्मियों की मिलीभगत से चिलबिला रेलवे जंक्शन पर एसटीबीए (स्टेशन टिकट बुकिंग एजेंट) सिस्टम से काफी संख्या में स्लीपर के टिकट निकल गए। इनको बकायदा मुंह मांगे दामों पर यात्रियों को बेचा गया। इनमें से अधिकांश टिकट मुंबई के लिए बेचे गए हैं। रेलवे के अधिकारियों ने मामला पकड़ा, तब जाकर चिलबिला में चल रहे इस खेल का पर्दाफाश हुआ। खुलासा होने के बाद सीनियर डीसीएम लखनऊ ने पूरे प्रकरण की जांच का आदेश दिया है।
अनारक्षित टिकट बांटने के लिए रेलवे ने एसटीबीए सिस्टम की व्यवस्था की है। इसमें एजेंट स्टेशन अधीक्षक और एसएम की निगरानी में टिकट बांटते हैं। इस सिस्टम से स्लीपर का टिकट भी बन जाता है, मगर रेलवे ने उस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। अगर कोई एजेंट ऐसा करता है तो यह रेलवे के नियमों का उल्लंघन है। मगर चिलबिला के रेलकर्मी और एजेंटों ने मुंबई के टिकटों की मारामारी को देखते हुए बड़ा खेल किया है। लेकिन एजेंट ने एसटीबीए सिस्टम से स्लीपर क्लास के पचासों टिकट निकालकर जरूरतमंदों को मुंह मांगे दामों पर बेच दिए। चिलबिला में काफी समय से चल रहे इस गोरखधंधे को हाल ही में रेलवे की कम्प्यूटर साफ्टवेयर कंपनी के अधिकारियों ने मानीटरिंग के दौरान पकड़ लिया। उन्होंने इस बारे में लखनऊ के डीआरएम और सीनियर डीसीएम को सूचना दी। सीनियर डीसीएम अजीत सिन्हा ने सीएमआई को भेजकर जांच कराई तो मामला सही पाया।
सीएमआई ने इसकी रिपोर्ट भेज दी है। सूत्रों का कहना है कि जनवरी माह में करीब बीस टिकट स्लीपर के निकाले गए। अधिकांश मुंबई के हैं। मामले का खुलासा होने के बाद एसएम, एसएस और एजेंट अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। एसएस चिलबिला आरपी तिवारी ने बताया कि जनवरी के दूसरे सप्ताह में करीब दस टिकट स्लीपर के एसटीबीए से निकाले गए हैं। उधर, सीएमआई आरएस चौरसिया का कहना है कि उन्होंने इस मामले की रिपोर्ट बनाकर लखनऊ डिवीजन को भेज दी है। एसटीबीए सिस्टम से स्लीपर क्लास का टिकट बनाकर बेचना नियम के खिलाफ है।