महाविद्यालय में पढ़ाई करना जितना आसान है, डिग्री पाना उतना ही मुश्किल। स्नातक, परास्नातक उत्तीर्ण करने के बाद छात्र-छात्राओं को डिग्री के लिए महाविद्यालय व विश्वविद्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। शुल्क जमा करने के बाद भी उन्हें डिग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इस बात को लेकर अभिभावक व छात्र-छात्राओं में रोष है।
महाविद्यालयों में अध्ययन करने वाले स्नातक, परास्नातक छात्र-छात्राओं को उत्तीर्ण होने के बाद मार्कशीट तो मिल जाती है, लेकिन डिग्री के लिए उन्हें चक्कर लगाना पड़ता है।
जबकि महाविद्यालय में प्रवेश के दौरान ही छात्र-छात्राओं से 250 रुपये डिग्री शुल्क जमा करा लिया जाता है। इसके बाद भी परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद उन्हें डिग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती है। ऐसे में अभिभावक व छात्र-छात्राओं को डिग्री के लिए महाविद्यालय व विश्वविद्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। आखिर में परेशान होने के बाद वह बिना डिग्री के ही काम चलाते हैं। विश्वविद्यालय, छात्र-छात्राओं को डिग्री उपलब्ध कराने के लिए महाविद्यालयों से शुल्क जमा कराने के लिए कहता है। इस शुल्क को बिना जमा किए छात्र-छात्राओं को प्रवेश नहीं मिल पाता। शुल्क जमा करने के बाद भी छात्र-छात्राओं को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है।
विश्वविद्यालय नियम के अनुसार जिस तरह छात्र-छात्राओं को मार्कशीट उपलब्ध कराई जाती है। उसी तरह डिग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी महाविद्यालय की है। डिग्री के लिए आनलाइन आवेदन करने के बाद महाविद्यालय ही आवेदन फार्म को अग्रसारित करता है। इसलिए डिग्री उपलब्ध कराना महाविद्यालय की जिम्मेदारी है। वहीं महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्र-छात्राओं को डिग्री विश्वविद्यालय से उपलब्ध होती है। इसकी जिम्मेदारी महाविद्यालय की नहीं है। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के नियमों के मकड़जाल में फंसने के बाद परेशान छात्र-छात्राएं आखिर में डिग्री पाने की उम्मीद ही नहीं रखते हैं। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं, लेकिन छात्र-छात्राओं के भविष्य को लेकर कोई चिंतित नहीं है।