जिले के पशु चिकित्सालयों में तैनात डॉक्टर अब सेटिंग पर नौकरी नहीं कर पाएंगे। शासन ने अस्पताल छोड़कर गायब रहने वाले डाक्टरों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए गोपनीय जांच कराने को कहा है।
जिले के पशु चिकित्सालयों में डॉक्टर की जगह पशुधन प्रसार अधिकारी और वार्ड ब्वॉय काम संभाल रहे हैं। गैर जनपद से आने वाले चिकित्सक पखवारे में एक दिन आकर हस्ताक्षर बनाकर चलते बनते हैं। विभागीय लोगों की मानें तो अधिकांश चिकित्सक ऐसे हैं जो अस्पताल आते ही नहीं है और दस्तखत करने के लिए रजिस्टर मुख्यालय पर आ जाता है। चिकित्सकों की इस लापरवाही के चलते ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टर जहां पशुपालकों को लूट रहे हैं, वहीं पशुओं में लगने वाली बीमारियों पर नियंत्रण नहीं होने से उनकी असमय मौत हो जा रही है।
बीते सप्ताह बेलखरनाथधाम ब्लॉक के कठार गांव में झोलाछाप डॉक्टरों की असावधानी से बकरी और भेड़ों की मौत का मामला शासन तक पहुंच गया है। भारी वेतन लेकर विभाग के बजट पर चोट पहुंचाने वाले चिकित्सकों की कुंडली खंगालने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी ने गोपनीय जांच करना प्रारंभ कर दिया है। विभाग जिस प्रकार जांच करा रहा है, उससे प्रतीत होता है कि आने वाले दिनों में सेटिंग से नौकरी करने वाले डाक्टरों पर शासन की गाज गिर सकती है। जिला पशु चिकित्साधिकारी डा. वीपी सिंह ने बताया कि सिर्फ रजिस्टर पर नौकरी करने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। जो डाक्टर अस्पताल से गायब रहते हैं, उनकी गोपनीय जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।