बच्चों को यूनीफार्म बांटने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने 75 प्रतिशत धनराशि दी थी। विभागीय अधिकारियों ने यह कहा था कि उपभोग प्रमाणपत्र जमा करने के बाद 25 प्रतिशत धनराशि भेजी जाएगी। अक्तूबर माह में भेजी गई धनराशि का उपभोग प्रमाणपत्र विभाग में आने के बाद भी बकाया धनराशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के साथ ही राजकीय और सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में छह से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को दो-दो सेट ड्रेस देने के लिए प्रति छात्र 400-400 रुपये भुगतान का मानक रखा गया है। विभाग ने अक्तूबर माह में लागत की 75 प्रतिशत धनराशि पहली किश्त के रूप में प्रति बच्चा 300-300 रुपये का भुगतान करते हुए अविलंब ड्रेस वितरण का निर्देश दिया था। बकाया 25 प्रतिशत धनारशि उपभोग प्रमाणपत्र जमा करने के बाद देने की बात कही गई। बीएसए का आदेश जारी होते ही हेडमास्टरों ने आनन-फानन में रुपये का सदुपयोग करते हुए ड्रेस का वितरण कर दिया। जबकि उपभोग प्रमाणपत्र कार्यालय आने के बाद भी स्कूलों में धनराशि नहीं भेजी जा रही है।
इधर, रुपये नहीं मिलने से बकाएदार आए दिन स्कूलों में पहुंचकर हेडमास्टरों से सवाल-जवाब कर रहे हैं दूसरी ओर बेचारे गुरुजी 25 प्रतिशत धनराशि भुगतान के लिए कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। बीएसए माधवजी तिवारी के मुताबिक बकाया 25 प्रतिशत धनराशि के भुगतान के लिए पर्याप्त बजट विभाग में है। जल्द ही ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा।