कालेजों ने कमाई करने के लिए फीस वसूलने का नया फंडा निकाला है। गृह परीक्षा व छात्र-छात्राओं के विकास के नाम पर अभिभावकों से शुल्क वसूला जा रहा है। जबकि वसूले जा रहे शुल्क का विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्क में जिक्र तक नहीं है। ऐसे में खुलेआम अभिभावकों को बेवकूफ बनाकर उनकी जेब काटी जा रही है। कालेजों की मनमानी से छात्र-छात्राओं व अभिभावकों में रोष है।
जिले के कुछ कालेज कमाई करने के लिए अभिभावकों व छात्र-छात्राओं को फीस के नाम पर धोखा दे रहे हैं। छात्र-छात्राओं के विकास व गृह परीक्षा के नाम पर खुलेआम शुल्क वसूला जा रहा है। जबकि विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्कों में इस तरह के किसी का शुल्क को जमा कराने का जिक्र नहीं है। कालेजों की मनमानी से अभिभावकों में रोष है। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि उनसे हर वर्ष गृह परीक्षा व विकास के नाम पर शुल्क वसूला जाता है। शुल्क न देने पर उन्हें कालेज में प्रवेश से मना कर दिया जाता है।
उनका कहना है कि गृह परीक्षा के नाम पर शुल्क तो वसूला जाता है, लेकिन साल में एक बार भी गृह परीक्षा नहीं कराई जाती है। इस बात को लेकर कई बार विरोध किया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हो सका। इस बारे में एमडीपीजी के जनसूचना अधिकारी डॉ. सीएन पांडेय का कहना है कि विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्क में गृह परीक्षा जैसे शुल्क कोई जिक्र नहीं है। यदि कोई कालेज इस तरह के शुल्क वसूल रहा है तो गलत है।