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34 वर्षों से मुआवजे के लिए अफसरों की चौखट रगड़ रहे किसान

Sat, 30 Jan 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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अफसरों की चौखट रगड़ते-रगड़ते 34 साल गुजर गए, लेकिन दर्जन भर किसानों को मुआवजे की धनराशि नहीं मिल सकी। मुआवजे की तो बात ही छोड़ दीजिए यही तय नहीं हो सका कि धनराशि दी भी जानी चाहिए या नहीं। सभी एक दूसरे पर इसकी जिम्मेदारी थोपते रहे। 2005 में आए जनसूचना अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू हुई तो फिर से एक बार मामला चर्चा में आ गया। बावजूद इसके अब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है।
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सन 1982 में मलाका रजाकपुर में नरसिंहपुर माइनर की खुदाई हुई थी। इसमें काफी लोगों को उनके खेत का मुआवजा मिला था। इसमें से गांव के गोपालशरण मिश्र, खुशहाल मिश्र, शिवप्रसाद मिश्र, पुरुषोत्तम प्रसाद मिश्र, परमात्मादीन शुक्ला, कन्हैयालाल मिश्र सहित एक दर्जन लोगों को मुआवजा नहीं मिला। लोगों ने इस पर प्रयास करना शुरू किया तो पता चला कि खोदाई के लिए मुआवजा देने का काम विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग कराता है और इसका कार्यालय सीतापुर में है। किसानों ने कुछ दिन तो जोश में दौड़ लगाई। बाद में सभी शांत होकर बैठ गए। 2014 में किलहनापुर के सदाशिव के पुत्र गोपाल शरण ने जनसूचना के तहत विभागों से सूचना मांगनी शुरू की। सूचना में अपरजिलाधिकारी ने माना कि खोदाई अवैध हो गई है। इसके लिए विशेष अध्याप्ति विभाग को मुआवजा देना चाहिए।

जानकारी मिलते ही गोपाल शरण ने अधिशाषी अभियंता सिंचाई को लिखा कि उनके खेत से नहर को हटा लिया जाए और 32 वर्षों का मुआवजा 16 लाख रुपये दिलवाया जाए। सिंचाई विभाग ने इसमें फिर से एक पेच फंसा दिया कि वह विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग से यह प्रमाणपत्र लाकर दे कि उसे मुआवजा नहीं मिला है। किसानों ने एक बार फिर भागदौड़ शुरू की, लेकिन इस बार जनसूचनाधिकार भी काम नहीं आया। इस बारे में न तो विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग से कोई सूचना आई और न ही कोई कार्रवाई ही हो पाई। अब किसान इस मामले को न्यायालय में ले जाने की तैयारी में लगे हुए हैं।
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