नगर पालिका परिषद की बैठक स्थगित होने की खबर पर सभासदों ने शनिवार को कार्यालय में जमकर हंगामा किया। कर्मचारियों को कार्यालय से बाहर निकालकर ताला जड़ दिया। हंगामे के दौरान कार्यालय पहुंचे ईओ को सभासदों ने बाहर ही रोक लिया और उनके व अध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
नगर पालिका परिषद की शनिवार को बैठक करने का एजेंडा सभासदों को जारी किया गया था। तय समय के कुछ पहले ही नगर पालिका कार्यालय की ओर से सभासदों को जानकारी दी जाने लगी कि बैठक अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दी गई है। बैठक बाद में होगी और उसकी सूचना सभी सदस्यों को दे दी जाएगी। यह खबर मिलते-मिलते अधिकांश सभासद नगरपालिका कार्यालय आ चुके थे। अचानक बैठक स्थिगित होने से सभासद आक्रोशित हो उठे और हंगामा करते हुए कार्यालय से कर्मचारियों को बाहर निकालकर तालाबंदी करने लगे।
इस दौरान विरोध कर रहे सभासद चंदन सिंह, अख्तर राईन, देवव्रत, छाया श्रीवास्तव, श्रीनाथ यादव, उमेशचंद्र, मुहिब्बुल आरफीन, इश्तियाक अहमद, त्रिलोचन सिंह, धर्मशील शुक्ला, परवीन बानो, आशा किरण सिंह, जानकी देवी समेत दूसरे सभासदों ने ईओ अवधेश यादव को भी कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया और बैठक स्थगित करने को लेकर नाराजगी जताने लगे। ईओ ने सभासदों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।
नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी अवधेश यादव ने सभासदों को बताया कि अध्यक्ष से बात हुई है। 6 फरवरी को बोर्ड की बैठक पुन: उसी एजेंडे पर बुलाई जाएगी। यह सुनते ही सभासदों ने जवाब दिया कि उस दिन वे भी बैठक में शामिल नहीं होंगे। किसी की भी मनमर्जी नहीं चलने दी जाएगी।
नगर पालिका परिषद की बैठक दो दिनों से टल रही है। सभासदों का आरोप है कि उन्हें सूचना दी गई थी कि 29 जनवरी को बोर्ड की बैठक है। शनिवार को नगर पालिका से मैसेज मिला कि बैठक स्थगित हो गई है। जिसके पीछे का कारण शुक्रवार को ही विधानसभा का सत्र प्रारंभ होना बताया गया। जिसके चलते 30 जून को बैठक बुलाई गई थी। बैठक के समय से पहले सूचना मिली कि नगर पालिका अध्यक्ष के बाहर होने के कारण बैठक स्थगित की जा रही है। इसी को लेकर सभासद खासे आक्रोशित दिखे।
करीब तीन माह पूर्व नगर पालिका के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर थे। जिससे शहर में साफ- सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा उठी थी। उस समय अपरजिलाधिकारी पुनीत शुक्ला प्रशासक थे। उन्होंने नगर पालिका बोर्ड की बैठक बुलाई। जिसमें गिने-चुने सभासद ही शामिल हुए थे। शनिवार को पालिका परिसर में इस बात की चर्चा होती रही कि अधिकांश सभासद उस समय हुई बोर्ड की बैठक से गायब थे। जबकि बैठक शहर के विकास कार्यों को लेकर ही बुलाई गई थी। उस समय किसी भी सभासद को सफाई कर्मचारियों के हित की याद नहीं आई।