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पीजी में एग्रीकल्चर न होने से सब्जेक्ट बदलने को मजबूर

Fri, 29 Jan 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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जिले में कृषि विषय से उच्च स्तर की पढ़ाई के लिए कोई अवसर नहीं है। जबकि इंटर तक की कक्षाओं में कृषि विषय की पढ़ाई लगभग सभी कॉलेजों में कराई जाती है। इंटर परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद छात्र-छात्राओं को आगे की पढ़ाई करने के लिए दूसरे जिले में जाना पड़ रहा है। वहीं तमाम छात्र-छात्राएं मजबूरी में दूसरी स्ट्रीम से पढ़ाई करना शुरू कर देते हैं।
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सरकार एक तरफ युवाओं को कृषि क्षेत्र की जानकारी से अवगत कराने के लिए समय-समय पर ग्रामीण स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम कराती है। जिससे वह कृषि क्षेत्र की बारिकियों से परिचित हो सकें। तमाम अभिभावक भी अपने बच्चों को कृषि विषय से ही पढ़ाना पसंद करते हैं। आम जीवन से कृषि की पढ़ाई जुड़ी होने की वजह से इस स्ट्रीम से अधिकांश छात्र-छात्राएं कैरियर बनाने के इच्छुक रहते हैं। इसलिए वह हाईस्कूल में वैकल्पिक विषय के रुप में कृषि विषय से पढ़ाई करते हैं। उसके बाद इंटर में विज्ञान वर्ग में प्रवेश लेकर कृषि विषय की पढ़ाई करते हैं, लेकिन उनके सामने समस्या तब हो जाती है जब वह स्नातक स्तर पर इस विषय की पढ़ाई अपने जिले में करने के लिए सोचते हैं। उसके बाद उन्हें मायूसी हाथ लगती है।

दरअसल, एमएमपीजी कालेज कालाकांकर को छोड़कर जिले के किसी भी महाविद्यालय में कृषि से स्नातक स्तर की पढ़ाई नहीं कराई जाती। साथ ही जिले के किसी भी महाविद्यालय में परास्नातक स्तर पर इस विषय के अध्ययन के लिए कोई सुविधा नहीं है। वहीं एमएमपीजी कॉलेज में केवल स्नातक स्तर तक ही पढ़ाई कराई जाती है। उसके बाद  एमएससी कृषि से करने के लिए छात्र-छात्राओं को दूसरे जिलों के कालेजों में दाखिले के लिए भटकना पड़ता है। तमाम छात्र-छात्राओं को प्रवेश भी नहीं मिल पाता है। ऐसे में उन्हें मजबूरी में दूसरे स्ट्रीम से पढ़ाई करनी पड़ती है। शहर लेकर गांव तक दर्जनों महाविद्यालय हैं, लेकिन कृषि विषय की पढ़ाई के लिए कोई सुविधा नहीं है।
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