कुष्ठ निवारण अभियान से अब आशा बहुओं को जोड़ लिया गया है। ये कुष्ठ रोगियों को खोजकर उनका इलाज कराएंगी। जो भी आशा बहुएं ऐसा करेंगी, कुष्ठ विभाग की ओर से उनको पुरस्कृत किया जाएगा। कुष्ठ निवारण पखवारा 30 जनवरी से 13 फरवरी के बीच मनाया जाएगा।
जिले में कुष्ठ रोगियों को खोजने की जिम्मेदारी आशाओं को दी गई है। आशाएं अपने क्षेत्र मेें कुष्ठ रोगी खोजेंगी। अगर संदिग्ध रोगी उनको मिलता है तो वह कुष्ठ से संबंधित लक्षणों की पड़ताल करेंगी। रोगी को अस्पताल ले जाकर उसका रजिस्ट्रेेशन कराएंगी। रजिस्ट्रेशन कराने पर उनको दो सौ पचास रुपये मिलेंगे। अस्पताल में कुष्ठ रोग के विशेषज्ञ मरीज को देखेंगे। उसके बाद दवा शुरू कर दिया जाएगा। दवाओं को मरीज को खिलाने का काम आशा का होगा।
चिकित्सकों का मानना है कि कुष्ठ बीमारी को ठीक करने के लिए दो तरह की दवाओें का कोर्स चलता है। एक कोर्स छह और दूसरा बारह महीने का होता है। 6 माह का कोर्स चलने पर आशा, बहुओं को प्रति मरीज चार सौ रुपये और 12 माह के कोर्स पर छह सौ रुपये मिलेंगे। आशा एक रोगी के आसपास के दस घरों का सर्वे करेंगी तो इसके लिए उसको अलग से दो सौ रुपये मिलेंगे। पखवारे के बीच कुष्ठ विभाग का संवेदीकरण कार्यक्रम होगा। इसके लिए जिले में तीन स्थानोें का चयन किया गया। बाघराय, कोहड़ौर और लक्ष्मणपुर।