शहर में अतिक्रमण कर हजारों लोगों को रोज तकलीफ देने वालों की सियासत के सामने प्रशासन ने हथियार डाल दिए हैं। कुछ दिन पूर्व चलाए गए अभियान की हवा निकल गई है। नगर की शक्ल बिगाड़ने वाले चंद स्वार्थियों के आगे अफसर खामोश हैं। जिस उद्देश्य से अभियान चला था वह सफलता से मीलों दूर है। कानून का पाठ पढ़ाने वाले अधिकारी ही नियमों का पालन नहीं करा पा रहे हैं।
शहर में जाम की समस्या व सड़कों पर हुए अतिक्रमण को देखते हुए कुछ दिनों पहले नगर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया गया था। निरीक्षण और अतिक्रमण की गई सड़क व नालों को चिन्हित करने में वक्त तो लगा ही, चूना आदि पर धर्न भी खर्च हुआ। प्रशासन के दावे को देख हजारों लोगों को उम्मीद बंधी कि अब शायद अतिक्रमण से मुक्ति मिल सकेगी। शहर की सूरत बेहतर हो सकेगी। लेकिन हकीकत इसके उलट दिख रही है।
शासन के निर्देश का पालन कराने की डींग हांकने वाले अफसर अभियान की सफलता के दावे पर ज्यादा देर नहीं टिक सके। प्रतिदिन अतिक्रमण से बिगड़े शहर के स्वरूप में जाम से हजारों यात्री जूझ रहे हैं। एक भी सड़क अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी।