नियमित करने और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर कचहरी में धरना-प्रदर्शन कर रहीं रसोइयों की हालत गुरुवार की सुबह और बिगड़ गई। एंबुलेंस से उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चार की हालत अधिक खराब होेने पर इलाहाबाद के लिए रेफर कर दिया गया।
जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में खाना बनाने के लिए तैनात रसोइयां मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर बुधवार से धरना प्रदर्शन कर रही थीं। मानदेय बढ़ाने के मुद्दे पर असहाय बने अफसर देर रात तक उन्हें मनाने का प्रयास करते रहे, मगर वे तैयार नहीं हुईं। अपनी जिद पर अड़ीं सैकड़ों रसोइयां रातभर कचहरी में बगैर खाना-पीना खाए बैठी रहीं। सुबह ठंड लगने से लगभग एक दर्जन रसोइयों की हालत बिगड़ गई।
इसकी जानकारी अधिकारियों को होने पर एंबुलेंस बुलाकर उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। कलावती, रामदुलारी, सरिता देवी, ऊषा देवी, गीता, आशा देवी, निर्मला देवी का इलाज करने के बाद जिला अस्पताल से छुट्टी कर दी गई, जबकि चार अन्य की हालत खराब होने पर उन्हें इलाहाबाद के लिए रेफर कर दिया गया। यह सब होने के बाद भी कचहरी परिसर में रसोइयों का जमावड़ा लगा रहा। इधर शिवगढ़, गौरा, आसपुर देवसरा, पट्टी इलाकों के अधिकांश रसोइयों के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने से एमडीएम का चूल्हा ठप रहा। स्कूल आने वाले बच्चों को भूखे पेट लौटना पड़ा।
बीएसए माधवजी तिवारी ने बताया कि धरना-प्रदर्शन करने वालीं रसोइयों की मांग जायज नहीं है। नौकरी पक्की करना और मानदेय बढ़ाने का फैसला करना शासन का काम है। जिला स्तरीय अधिकारियों को यह अधिकार नहीं प्रदान किया गया है। इसलिए बेहतर होता कि यह लोग लखनऊ में धरना-प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान केंद्रित करते।