जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में 11 साल बाद एक बार फिर ब्लाक, जिला, मंडल और प्रदेश स्तर पर एथलेटिक्स प्रतियोगिता कराने का फैसला किया गया है। शासन ने पहली बार बेसिक शिक्षा विभाग को 1,02,276 रुपये का बजट आवंटित कर फरवरी माह में प्रतियोगिताएं आयोजित करने के कहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले ग्यारह वर्ष से बंद हुई खेलकूद प्रतियोगिता एक बार फिर कराने की निर्णय लिया है। विभाग की इस पहल से ग्रामीण इलाकों के बच्चों को प्रतिभा निखारने का खुला मंच मिलेगा, वहीं जिले में तैनात व्यायाम शिक्षकों की भी पहचान बनेगी। बतादें कि प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद क्रीड़ा शुल्क पर रोक लग गई थी। बजट नहीं मिलने के कारण पिछले ग्यारह वर्ष से विभाग में खेलकूद प्रतियोगिता पर विराम लग गया था।
गांव के बच्चों की उठ रही आवाज शासन तक पहुंचने में 11 वर्ष लग गए। शिक्षा निदेशक बेसिक ने बालक, बालिकाओं में खेलकूद प्रतियोगिता के प्रति अभिरुचि पैदा करने के लिए 1,02,276 रुपये का बजट उपलब्ध कराया है। हालांकि ब्लाक, जिला, मंडल और प्रदेश स्तर पर होनी वाली प्रतियोगिताओं के लिए यह धनराशि काफी कम है, मगर बड़ी बात यह है कि खेलकूद प्रतियोगिता के लिए पहली बार धनराशि आवंटित की गई है। मंडल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता सात फरवरी से 17 फरवरी और प्रदेश स्तरीय 20 से 26 फरवरी तक होगी। इन तिथियों के पहले ब्लाक और जिला स्तर पर प्रतियोगिता कराने को कहा गया है। बीएसए माधवजी तिवारी ने बताया कि खेलकूद के लिए पहली बार धनराशि आवंटित की गई है। मगर धनराशि इतनी कम है कि उसमें खेलकूद कराना संभव नहीं लग रहा है।
दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेंक और चक्का फेंक, हैंडबाल, खो-खो, कबड्डी सहित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रतियोगिताएं होंगी। इसमें प्रथम तीन स्थान बनाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया जाएगा। प्रत्येक ब्लाकों में होने वाली खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित कराने की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों पर सौंपी गई है।