विश्वविद्यालय के नियमों को ताक पर महाविद्यालयों ने छात्रों के प्रवेश के नाम पर जमकर मनमानी की। इस बार छात्रों को शिक्षा के अधिकार से ही वंचित कर दिया गया। स्नातक व परास्नातक के प्राइवेट परीक्षा फार्म महाविद्यालय प्रशासन ने जमा करने से मना कर दिया। इस तरह छात्रों के शैक्षिक भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ पर अभिभावकों ने रोष जताया है।
डा. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से प्राइवेट पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों का परीक्षा फार्म महाविद्यालय प्रशासन ने लेने से मना कर दिया। जबकि विश्वविद्यालय के नियम के अनुसार सभी छात्र-छात्राओं का परीक्षा फार्म जमा किया जाना था। महाविद्यालय प्रशासन की मनमानी ने इस बार हजारों छात्रों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया। ऐसे में छात्रों की भीड़ दूसरे विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए चक्कर काट रही है। उनका आरोप है कि दो साल से उनके परीक्षा फार्म जमा नहीं किया जा रहे हैं।
ऐसे में हर साल उन्हें बेवकूफ बनाया जा रहा है। जबकि शुरुआत में महाविद्यालय प्रशासन प्रवेश लेने की बात करता है, लेकिन दलालों के वश में होने के कारण उन्हीं छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिल पाता है जिन्होंने सुविधा शुल्क दिया है। ऐसे में हर साल तमाम गरीब छात्र सुविधा शुल्क न चुका पाने की स्थिति में परीक्षा से वंचित कर दिए जाते हैं। महाविद्यालय प्रशासन की लापरवाही से छात्रों व अभिभावकों में रोष है। बता दें कि महाविद्यालयों में परीक्षा फार्म जमा करने की अंतिम तिथि 10 जनवरी थी। एमडीपीजी के जनसूचना अधिकारी डॉ. सीएन पांडेय ने बताया कि परीक्षा में कुर्सी, मेज समेत तमाम संसाधनों का अभाव रहता है। इस वजह से छात्रों का प्रवेश लेने में परेशानी होती है।
एक भी छात्र का नहीं जमा हुआ फार्म
शहर के किसी भी कालेज में एक भी छात्र का परीक्षा फार्म नहीं जमा किया गया। ऐसे में छात्रों का एक वर्ष खराब हो गया। आरोप है कि शुरुआत में महाविद्यालय प्रशासन ने प्रवेश लेने की बात कही थी, लेकिन बाद में एक भी छात्र का परीक्षा फार्म नहीं जमा हुआ। सब छात्रों को वापस कर दिया गया।
विलंब शुल्क के साथ भर सकेंगे फार्म
व्यक्तिगत परीक्षा फार्म भरने के लिए राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय ने छात्र-छात्राओं को एक और मौका दिया है। वह विलंब शुल्क के साथ परीक्षा फार्म भर सकेंगे। 15 से 25 जनवरी तक 200 रुपये शुल्क व 1 से 7 फरवरी तक 350 रुपये विलंब शुल्क के साथ फार्म जमा किया जा सकेगा।