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सफलता के लिए मेहनत के साथ जुनून जरूरी

Mon, 22 Jun 2015 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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अभावों और संसाधानों की कमी के साथ गरीबी से जूझते हुए आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में बेहतर रैंक हासिल करने वाले मजदूर के दो बेटों ने यह साबित कर दिखाया है मन में संकल्प हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। जरूरत है तो सिर्फ लगन, मेहनत और जुनून की। लालगंज तहसील के रेहुआलालगंज निवासी राजू व उनके भाई बृजेश ने रविवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत की। ढिबरी की रोशनी में पढ़ने वाले इन गुदड़ी के लालों ने गरीब बच्चों को दिल लगाकर जुनून के साथ पढ़ाई करने का संदेश दिया। कहा लगन और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो पढ़ाई की राह में गरीबी आड़े आ ही नहीं सकती है। पेश है दोनों मेधावियों से हुई बातचीत के संशोधित अंश।  
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प्रश्न- इतनी बड़ी परीक्षा के लिए तैयारी कैसे की?

राजू-गरीब परिवार का बच्चा हूं। सामान्य बच्चों की तरह मैंने भी पढ़ाई की। दिनभर कड़ी मेहनत के बाद भोर में और शाम पांच से रात 11 बजे तक जब भी समय मिलता था, पढ़ाई करते थे। कोशिश करते थे कि ज्यादा से ज्यादा समय पढ़ाई के लिए निकालें।
प्रश्न-इसके लिए किससे मिली प्रेरणा?
राजू- नवोदय विद्यालय में पढ़ते समय कक्षा 9 और 10 से ही मेहनत शुरू कर दी। यूं तो मदद तमाम लोगों ने की, पर बाबू इंटर कॉलेज के इतिहास के शिक्षक सुनील कुमार मिश्र हमेशा मेरी मदद में खड़े रहे। यहां से निकला तो दशिक्षा फाउंडेशन की एक परीक्षा पास कर ली। फिर उनकी कोचिंग में करीब तीन लाख रुपये लगने वाली फीस माफ हो गई। वहां भी कड़ी मेहनत कर पढ़ाई की। इस तरह दक्षिणा फाउंडेशन कोचिंग ने भी मेरी काफी मदद की।
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प्रश्न-इसके बाद आप आगे क्या करना चाहते हैं?
राजू-देश, जिले और समाज के साथ गरीब बच्चों के लिए बहुत कुछ करने का इरादा है। मैं एमबीए करने के बाद शेयर मार्केट में जाना चाहता हूं। इसके बाद अपने जिले में कोई बड़ी कंपनी खोलूंगा, ताकि यहां के बेरोजगार व गरीब भाई-बहनों को काम मिल सके।
प्रश्न-सफलता का श्रेय आप किसे देते हैं।
राजू-बृजेश-इस सफलता का श्रेय हम दोनों भाई अपनी मां और पिता को देते हैं। पढ़ाई में उन्होंने कभी गरीबी को लेकर हमारा मनोबल नहीं तोड़ा। वह हमेशा हौसला बढ़ाते रहे।
प्रश्न-किसका रहा मार्ग दर्शन?
राजू--नवोदय विद्यालय में पढ़ाई में मेरी लगन देख वहां के शिक्षक अखिलेश मिश्र ने मेरा काफी मार्गदर्शन किया। मैं उन सभी का आभारी हूं जो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मेरा मार्ग दर्शन करते रहे हैं।
प्रश्न-इतनी बड़ी सफलता के लिए दोनों भाई कितनी बार प्रयास किए?
राजू-बृजेश-ईश्वर की कृपा और सभी की दुआवों से पहली बार में ही दोनों भाई आईआईटी की परीक्षा निकाल लिए।
प्रश्न- सफलता से कैसा महसूस कर रहे हैं?
राजू-बृजेश- इस सफलता से हम दोनों भाई ही नहीं मेरा हमारा परिवार काफी खुशी महसूस कर रहा है। इतनी बड़ी उम्र में इससे ज्यादा खुशी आज तक नहीं मिली।
प्रश्न-किन-किन लोगों का फोन आप के पास आया?
राजू-बृजेश- राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फोन कर बधाई दी। फिल्म स्टार आमिर खान साहब ने भी फोन कर उत्साह बढ़ाया।

प्रश्न-आप दोनों भाइयों की आगे की क्या रणनीति है।?
राजू-बृजेश-एमबीए करने के बाद हम दोनों भाई शेयर मार्केट में जाना चाहते हैं। इसके बाद जिले में एक फैक्ट्री खोलने की तमन्ना है।
प्रश्न-और भाई बहनों के लिए क्या करना चाहते हैं।
राजू-बृजेश- हम दोनों भाई उनका मार्गदर्शन करना चाहते हैं। उन्हें यह समझाना चाहते हैं कि इंसान सिर्फ पढ़ाई से ही आगे बढ़ सकता है। शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है।
प्रश्न-मां-बाप के लिए आगे चल कर क्या करना चाहते हैं?
राजू-बृजेश-हम लोग सारा काम मां-बाप के लिए ही करेंगे। उन्होंने हमें जन्म देकर इस गरीबी में पाला है। कोशिश करेंगे कि सारे जहां की खुशियां हम उनके कदमों में डाल दें।
प्रश्न-आईआईटी की तैयारी के लिए गरीब बच्चों को क्या संदेश देंगे?
राजू-बृजेश-वह गरीबी से हताश होने के बजाय मेहन और जुनून के साथ पढ़ाई करें। कल तक हम दोनों भाइयों व मेरे परिवार को कोई नहीं जानता था। पढ़ाई और मेहनत की ही देन है कि आज पूरा देश जान गया। हम उनसे कहेंगे कि वे पढ़ाई में ध्यान दें।
प्रश्न-आईआईटी की तैयारी में कोचिंग कितनी जरूरी।
राजू-बृजेश- आईआईटी की तैयारी के लिए कोचिंग काफी जरूरी है। इसका मतलब ये नहीं कि गरीब बच्चे तैयारी नहीं कर सकते। भारत में तमाम संस्थाएं हैं। वह परीक्षाएं कराती हैं। उनकी परीक्षा पास करने पर वे पढ़ाई में पूरा मदद भी करती हैं।
प्रश्न-पैसे की कमी से क्या कभी मनोबल टूटा?
राजू-बृजेश- पढ़ाई में हम दोनों भाइयों का मन लगता था। गरीबी में संघर्ष तो था ही। कभी-कभी थोड़ा सोचते थे। मगर खुद पर भरोसा था। कभी हिम्मत नहीं हारी और जुनून के साथ हम पढ़ते रहे।
प्रश्न- आप की नजर में सफलता का मूल मंत्र क्या है?
राजू-बृजेश-देखिए कुछ भी करने व किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए मेहनत और जुनून का होना जरूरी है। इन्हीं दोनों बातों को हम मूलमंत्र भी मानते हैं।
प्रश्न-प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पैसा कितना मायने रखता है?
राजू-बृजेश-पढ़ने में लगन व कुछ कर गुजरने का संकल्प हो तो कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि पढ़ाई जैसे अच्छे कार्यों को करने के लिए मदद करने वालों की कमी देश में नहीं है।
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प्रश्न-भविष्य में देश के लिए क्या करना चाहते हैं?
राजू-बृजेश- देश के लिए पूरा जीवन खपा देना चाहते हैं। क्योंकि देश ही सर्वोपरि है।
प्रश्न-इंजीनियरिंग के क्षेत्र को ही क्यों चुना?
राजू-बृजेश-चाहत थी, इसलिए।
प्रश्न-आईआईटी में प्रवेश के लिए तैयारी कब से शुरू करनी चाहिए?
राजू-बृजेश-अच्छा होता है कि शुरू से ही एक लक्ष्य बना लिया जाए। यदि आप आईआईटी की ही तैयारी करना चाहते हैं तो शुरू से ही ध्यान दें।
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