जिला अस्पताल में सीएमएस, ईएमओ, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय की पिटाई की घटना से डॉक्टर और कर्मचारी अभी भी सहमे हुए हैं। वे ड्यूटी पर आने के बाद भी डरे-डरे से रहते हैं। आलम यह है कि मंगलवार को डॉक्टर बीच-बीच में ओपीडी छोड़कर बाहर निकल जाते थे।
अस्पताल का वातावरण अभी डॉक्टरों और कर्मचारियों के अनुकूल नहीं हो पाया है। हालांकि, मंगलवार को डॉक्टर ओपीडी, इमरजेंसी और ओटी में आए। मगर उनका पूरा ध्यान मरीजों पर नहीं रहा। वे कक्ष में बैठे थे, पूरा दिन ऐसे ही बीता। डॉक्टरों के बराबर न बैठने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया जा रहा है। इमरजेंसी की बात की जाए तो यहां भी कर्मचारी बेमन से काम करते दिखे। वार्ड ब्वाय और फार्मासिस्ट घूम फिरकर बाहर ही मिले। पूछने पर बताया जब डॉक्टर बैठेंगे तो वे भी अंदर जाएंगे।
थोड़ी सी बात पर चिल्लाने वाले डॉक्टरों के संघ के अलावा स्वास्थ्य कर्मचारियों के संगठनों ने भी इस मामले पर चुप्पी साध ली है। जिला अस्पताल में मारपीट की घटना को हुए पांच दिन बीत गए, मगर अभी तक कोई भी संगठन इस मुद्दे पर बोलने आगे नहीं आया। स्वास्थ्य महकमे की बात की जाए तो डॉक्टरों के दो संगठन हैं। पीएमएस और आईएमए। इसके अलावा फार्मासिस्ट एसोसिएशन और स्वास्थ्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का संगठन अलग है। डॉक्टर, फार्मासिस्ट और कर्मचारी दौड़ाकर पीटे गए, मगर एक भी संगठन न्याय के लिए आगे नहीं आया। किसी ने घटना की निंदा करने की जरूरत नहीं समझी।