चार साल की लावारिश बालिका के लिए न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के कार्यालय में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। बवाल की आशंका पर पहुंचे शहर कोतवाल ने किसी तरह लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। इसे लेकर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल कायम रहा। नगर कोतवाली के सरोज चौराहा निवासी सुनीता कटरा रोड स्थित कमला नर्सिंगहोम में काम करती थी। 23 फरवरी 2011 को नर्सिंगहोम के करीब ही नवजात बच्ची घायल अवस्था में मिली थी। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में सुनीता ने मासूम बच्ची को अपनाया। कई दिनों तक उसका उपचार करने के बाद उसे अपने घर ले गई। कुछ दिनों बाद उसे अपनी भाभी सुधा पत्नी लवकुश सिंह के हवाले कर दिया। चार साल बाद शुक्रवार को उसके घर पर कोतवाली पुलिस पहुंची और बच्ची को लेकर जाने लगी।
यह देख परिजन विरोध करने लगे। बाल कल्याण समिति के आदेश के अनुपालन के चलते पुलिसकर्मी बच्ची व उसकी देखभाल करने वाली सुधा को लेकर न्यायपीठ आ गए। कुछ ही देर में सुनीता भी दूसरे लोगों के साथ आ गई। लोगों ने आरोप लगाया कि बिना किसी नोटिस के चार साल तक बच्ची की परवरिश करने वाली सुनीता व सुधा से बच्ची को छीना जा रहा है जो गलत है। इसे लेकर परिसर में जमकर हंगामा हुआ। विवाद शांत कराने की कोशिश करने वाले पुलिसकर्मियों से लोगों की तकरार हुई। बवाल देख बच्ची को लेकर महिला सिपाही भीतर कमरे में चली गई। इस बीच बच्ची पालने वाली महिला के पक्ष से अधिवक्ता पहुंचे और अपनी बात रखने लगे। इसे लेकर समिति के सदस्यों व वकीलों से कहासुनी हुई। बवाल की खबर मिलने पर शहर कोतवाल अनिल कुमार दलबल के साथ पहुंचे। दोनों पक्षों की बात सुनकर सभी को शांत कराया। इसके बाद वैधानिक कार्रवाई करते हुए लावारिश बालिका को वाराणसी भेजने की प्रक्रिया प्रारंभ हो सकी।