प्रतापगढ़। प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों के प्रथम चरण के मतदान में झमाझम वोट बरसे। सुबह आठ बजे से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी लाइन लगी रही। छिटपुट घटनाओं के बीच पहले चरण में कुल 63.09 प्रतिशत मतदान हुआ है। जिला पंचायत और बीडीसी सदस्य के लिए बीते माह इन ब्लाकों में हुए मतदान से प्रधान के चुनाव में मतों का प्रतिशत 6.89 फीसदी बढ़ा है। जिला प्रशासन की किलेबंदी के चलते इस बार प्रधानी के चुनाव में मतदान केंद्रों पर कहीं भी खूनखराबा या बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएं नहीं हुईं। एक-दो जगहों पर बूथों के बाहर हाथापाई और मारपीट की मामूली घटनाएं हुईं।
प्रधानी और ग्राम पंचायत सदस्य के चुनाव का पहला चरण शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। जिला प्रशासन की किलेबंदी के चलते बूथों पर कोई वारदात नहीं हुई। पहले चरण के चुनाव में शिवगढ़, गौरा, पट्टी, बेलखरनाथधाम, और आसपुर देवसरा ब्लाकों में वोटिंग हुई। अपना प्रधान चुनने के लिए मतदाताओं ने दिल खोलकर वोटिंग की। पहले चरण में 63.09 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग कर प्रधान पद के 3147 और ग्राम पंचायत सदस्य पद के 3264 प्रत्याशियों का भाग्य मतपेटिकाओं में बंद कर दिया। शिवगढ़ के पांडेयतारा में फर्जी वोटिंग को लेकर दो घंटे तक मतदान बाधित रहा। अफसरों के पहुंचने पर मतदान प्रारंभ हुआ।
यहां मतदान शाम सात बजे तक चलता रहा। बेलखरनाथधाम के सरखेलपुर बूथ के बाहर एक प्रत्याशी की पिटाई कर दी गई। इसकी खबर जब बूथ पर पहुंची तो पुलिसकर्मियों ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी। थोड़ी देर बाद ही एएसपी दिनेश कुमार सिंह और सीआरओ रामसिंह वर्मा ने पैरामिलेट्री फोर्स के साथ पहुंचकर उपद्रवियों को खदेड़ दिया। शिवगढ़ ब्लाक के मेढौली जगदीशपुर में दो पक्षों के बीच हुई मारपीट में एक पक्ष से तीन और दूसरे पक्ष से दो लोग घायल हो गए। अमहरा गांव में भी दो प्रत्याशियों के बीच बूथ के बाहर मारपीट होने की खबर है।
शिवगढ़ ब्लाक के उगईपुर में मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण शाम छह बजे तक मतदान होता रहा। दोपहर में फर्जी वोटिंग को लेकर कुछ देर के लिए मतदान बंद हो गया था। बतादें कि मतदान का समय साढ़े चार बजे तक ही निर्धारित किया गया था।
प्रतापगढ़। पांचों ब्लाकों में शाम साढे़ चार बजे के बाद बैलेट बाक्स जमा करने के लिए पीठासीन अधिकारी उमड़ पडे़। भागने की जल्दी में लगे पीठासीन अधिकारी अफरातफरी के बीच देर रात तक बैलेट बाक्स जमा करते रहे।
पहले चरण का चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने के लिए डीएम अमृत त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सक्सेना ने पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रत्येक बूथ पर जिलास्तरीय अधिकारियों को स्टेटिक मजिस्ट्रेट बना दिया था। इससे मतदान केंद्रों पर भीड़ नहीं एकत्रित हो पा रही थी। सेक्टर मजिस्ट्रेटों का बोझ कम करने के लिए उन्हें तीन मतदान केंद्र से अधिक की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। इसके अलावा बूथों पर सुरक्षा के लिए भारी संख्या में फोर्स के साथ क्लस्टर मोबाइल भी लगातार गश्त करती रही।