प्रतापगढ़। दिवंगत इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या के बाद शासन के आदेश ने परिवार के लोगों की आर्थिक मदद में पेच फंसा दिया है। पत्नी को साधारण पेंशन से ही जीवन निर्वाह करना होगा।
पूर्व नगर कोतवाल अनिल कुमार की गुरुवार को शहर के वैष्णवी होटल के नीचे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दूसरे दिन ही आला अधिकारियों ने तमाम जांच पड़ताल के बाद मॉडल शाप में शराब पीने गए दो युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचा व बाइक भी बरामद की थी।
हालांकि घटना के बाद से ही पुलिस के खुलासे पर तमाम सवाल उठ रहे हैं। शासन के आदेश ने दिवंगत इंस्पेक्टर अनिल कुमार के परिवार को मुश्किलों में खड़ा कर दिया है। सूत्रों की मानें तो सरकार के आदेश के चलते पत्नी को मृतक आश्रित के तहत नौकरी समेत दूसरी मदद विभाग से मिलेगी, लेकिन आसाधारण पेंशन के स्थान पर साधारण पेंशन मिलेगी।
सरकार के आदेश में उल्लेख है कि ऐसी घटनाओं में परिवार को आसाधारण पेंशन नहीं मिलेगी। इंस्पेक्टर निलंबित थे और उनकी जांच चल रही थी। इसका कोई फर्क दूसरी सुविधाओं पर नहीं पड़ेगा। केवल पेंशन को लेकर ही अड़चन है।
पूर्व नगर कोतवाल अनिल कुमार भले ही दुनिया से विदा हो गए हैं, लेकिन अभी भी उनका नाम नगर कोतवाली में दर्ज होने वाले मुकदमों में बखूबी लिखा जा रहा है। इसका खुलासा बिजली चोरी के दर्ज कराए गए मुकदमे से हुआ। यह देख लोग हैरत में पड़ गए।
अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की हत्या का खुलासा न करने के आरोप में पुलिस अधीक्षक ने पूर्व नगर कोतवाल अनिल कुमार को 3 नवंबर की रात निलंबित कर दिया। इसके बाद हरपाल सिंह यादव को नगर कोतवाली की कमान सौंप दी गई। हैरत की बात यह है कि कोतवाली में उसके बाद से लगातार मुकदमे लिखे जा रहे हैं। जीडी पर वर्तमान नगर कोतवाल हरपाल सिंह यादव का नाम चल रहा है। जबकि कंप्यूटर से दर्ज होने वाले मुकदमे में अभी दिवंगत इंस्पेक्टर अनिल कुमार का नाम लिखा जा रहा है।