जिले का ऐतिहासिक भरत मिलाप रविवार को परंपरागतढंग से चौक घंटाघर पर संपन्न हो गया। लक्ष्मण के साथ सीता को लेकर अयोध्या पहुंचे श्रीराम, भाई भरत से गले मिले। इस पर लोगों की आंखें भर आईं। श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। भरत ने उनको अयोध्या की राजगद्दी सौंपकर अपना फर्ज पूरा किया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक किया गया। मंगलगीत गाए गए। सभी की आरती उतारी गई। झांकियों ने मेले में चार चांद लगा दिए।
वैसे तो शनिवार को मोहर्रम के बाद भरत मिलाप की तैयारी तेज कर दी गई थी।
जैसे जैसे रात होती जा रही थी मेले में भीड़ जा रही थी। शानदार सजावट और रोड लाइट के बीच मेला आधी रात के बाद पूरे सबाब पर था। चौक घंटाघर पर तिल रखने की भी जगह नहीं थी। जिले के अलावा पड़ोसी जनपदों से मेेले देखने हजारों श्रद्धालु आए। हर कोई मेले का आनंद लेता हुआ नजर आ रहा था। आधी रात के बाद कलात्मक झांकियों ने मेले को ऊंचाई प्रदान की। कलाकार अपने प्रदर्शनों से लोगों को मोह लिया। बच्चों ने खासकर मेले का लुत्फ उठाया। पूरी रात जागने के बाद लोगों की थकान रविवार सुबह चौकघंटाघर पहुंचते ही गायब हो गई। करीब आठ बजे भरत मिलाप संपन्न हुआ। भाई भरत ने श्रीराम को राजपाठ लौटाया।
राम और लक्ष्मण जब भरत से मिले रहे थे। उस समय यह दृश्य देख रहे हजारों श्रद्धालुओं की आंखें छलक गईं। कुछ क्षण के लिए लगा कि यह सब अयोध्यानगरी में हो रहा हो और वहां का पूरा जनमानस अपने राजा राम जो कि चौदह वर्ष बाद लौटे हो उनके दर्शन को व्याकुल हो गया हो। इस मौके पर लक्ष्मी नारायन मंदिर के पुजारी पं.वृद्धि चंद्र ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, भरत और हनुमान जी की आरती उतारी। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विजय सिंह, मंत्री सुनील सिंह, संरक्षक अश्वनी केसरवानी, पूर्व विधायक हरि प्रताप सिंह, राजीव गुप्ता, सियाराम ऊमरवैश्य, श्याम लाल खंडेलवाल, श्रीकिशोर अग्रवाल, गोविंद प्रसाद खंडेलवाल, रविगुप्ता, अनुज सिंह, तुषार खंडेलवाल, संजीव आहूजा आदि ने सहभागिता की।