भगवान श्रीराम लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ सीता को ब्याहने चल पड़े। ब्रह्मा, विष्णु और महेश बाराती बने। गाजे-बाजे और हाथी, घोड़े के साथ धूमधाम से बारात निकली। शहर के हजारों लोग इसके साक्षी बने। हर तरफ भीड़ का रेला टूट पड़ा। गुरु विश्वामित्र, नारद, हनुमान और देवतागण बारात में शामिल होकर उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। नगर के गोपालमंदिर से निकली राम बारात का दृश्य देखने से लग रहा था कि मानों सब कुछ जनकपुर में हो रहा हो। नगरवासी इस अलौकिक क्षण को अपने नेत्राें में बसाने के लिए आतुर थे।
अवसर था शनिवार को गोपालमंदिर से धूमधाम से झांकियों के बीच निकली श्रीराम बारात और शोभा यात्रा का। सीता को ब्याहने चले राम.., रामजी की निकली सवारी...यह धुन राम बारात में शामिल बैंड-बाजे से निकल रही थी। चहुंओर प्रसन्नता छाई हुई थी। देवी-देवताओं और ऋषि, मुनि सभी के चेहरे पर प्र्रसन्नता दिखाई दे रही थी। बारात के अगुवा मुनि विश्वमित्र थे जो एक रथ पर बैठे थे तो दूसरे रथ पर राजा दशरथ, हनुमान और नारद मुनि भी सवार होकर बारात की शोभा बढ़ाते हुए चल रहे थे।
चौक घंटाघर होते हुए बारात जेल रोड स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर में पहुंची। यहां पर श्रीराम समेत चारों भाइयों की आरती उतारी गई। पंडित वृद्धिचंद्र मिश्र ने मंत्रोच्चारण किया। जय श्रीराम और बोलबम के उद्घोष से मंदिर गूंजायमान हो उठा। इसके पूर्व रामलीला समिति के अध्यक्ष विजय सिंह और मंत्री सुनील सिंह ने राम और लक्ष्मण की आरती उतारी। बाबागंज, रेलवे स्टेशन, चौक घंटाघर, चिलबिला, महुली होते हुए बारात चौक पहुंची। यहां पर जयमाल के साथ सीता विवाह धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।