सूखे की मार से जूझ रहे किसानों को एक और भार झेलना होगा। शासन ने रबी की बुवाई से ठीक पहले डीएपी के दाम में वृद्धि कर दी है। डीएपी खरीदने वाले किसानों को प्रति बोरी 51 रुपये अधिक चुकता करना होगा। समितियों पर बची हुई पुरानी खाद को नई दर पर बेचा जा रहा है।
पानी के अभाव में किसानों की धान की फसल पूरी तरह से चौपट होने के कगार पर है। बीते वर्ष अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से नष्ट हुई फसल से किसान अभी उबर भी नहीं पाए थे कि अब वह सूखे की चपेट में हैं। शासन ने अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने का ऐलान किया था, लेकिन हजारों किसानों तक अब तक सरकारी इमदाद नहीं पहुंच सकी है। सूखती फसलों को देखकर परेशान किसान सरकार से बीज और खाद में नरमी की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन शासन ने उन्होंने जोर का झटका दे दिया है।
डीएपी खाद के दाम में प्रति बोरी 51 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। अब तक डीएपी की पचास किग्रा की बोरी 1140 रुपये में मिलती थी। अब प्रति बोरी 51 रुपये की बढ़ोतरी होने पर 1191 रुपये में मिलेगी। डीएपी के दामों में बढ़ोतरी होते देख पहले से समितियों पर डंप डीएपी को भी नई दर से बेचा जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो यह पूरी तरह गलत है। खरीफ माह में डीएपी बिक्री दर 1140 रुपये थी। अक्तूबर से समितियों पर पहुंचने वाले नए स्टाक में बढ़ा हुआ रेट शामिल है। सहायक निबंधक अरविंद प्रकाश ने किसानों को सावधान किया है कि वह डीएपी की बोरियों पर अंकित मूल्य ही चुकता करेंगे। उन्होंने बताया कि नई खाद की बोरियां 1191 रुपये और पुरानी बोरियों पर 1140 दर अंकित है। इसलिए किसान खरीदने के पहले बोरियों पर अंकित मूल्य देखकर खरीदें।