नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों ने भले ही दो सितंबर से मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की है, लेकिन उससे पहले भी शहर की साफ-सफाई को लेकर किसी को फिक्र नहीं थी। शहर के दस वार्ड हैं जहां लंबे समय से लोग भीषण गंदगी और दुर्गंध के बीच जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। शिकायत के बाद भी साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इस परेशानी से जूझ रहे शहरियों को कर्मचारियों की हड़ताल ने बेहाल कर रखा है।
शहर के दस वार्डों की हालत बेहद खराब है। हर तरफ कूड़े के ढेर लगे हैं। सड़क हो या घर व दुकान की पटरियां। लोगों को खुद ही साफ करना पड़ रहा है।
सफाई कर्मचारी कभी-कभार ही इन मोहल्लों में दर्शन देते हैं। शहर के बीचोंबीच बसे बेगमवार्ड मोहल्ले में गंदगी का साम्राज्य है। नालियां पटी हुई हैं। इससे गंदा पानी लोगों के आवागमन में समस्या पैदा करता है। कमोबेश यही हाल अजीत नगर, टक्करगंज, तहसील वार्ड, स्टेशन रोड, पूर्वी सहोदरपुर, करनपुर, मकंद्रूगंज वार्ड, विवेक नगर, आजाद नगर, सदर बाजार, अचलपुर का भी है। यहां के लोगों का आरोप है कि साफ-सफाई में उदासीन रवैया अपनाया जाता है। कई मोहल्लों में तो केवल खास लोगों के इर्द-गिर्द ही साफ-सफाई कराई जाती है। इन समस्याओं से जूझ रहे शहरियों की परेशानी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने बढ़ा दी है। अब तो हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। चौराहों, मोहल्लों में व्याप्त गंदगी से बीमारी फैलने की प्रबल आशंका है। इन मोहल्लों को लेकर यदि नगर पालिका प्रशासन ने सतर्कता नहीं बरती तो शायद कुछ दिनों बाद बीमार शहरियों से अस्पताल पटे नजर आएंगे। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर अधिकारी भी कोई ठोस निर्णय नहीं ले रहे हैं।