जिले में दाल और प्याज के भाव आसमान पर चढ़ते जा रहे हैं। ऐसा दाल और प्याज की आवक में कमी से हो रहा है लेकिन जमाखोरों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। दाल और प्याज की जमाखोरी हो रही है। मगर जिला प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। जानकारों का कहना है कि जमाखोरों पर कार्रवाई हो तो मुमकिन है कि दोनों के दाम में कुछ कमी आ जाए।
एक माह पहले तक फुटकर में15 से 20 रुपये किलो बिकने वाली प्याज अब अस्सी रुपये किलो बिक रही है। जबकि थोक में प्याज आढ़तियों के यहां से दुकानदारों को 60 से 65 रुपये किलो मिल रही है। सूत्रों की मानें तो प्याज के दाम में इजाफा होने की संभावना के चलते कारोबारी प्याज से अपने गोदाम भरने लगे हैं। थोक कारोबारी मनमाना दाम दुकानदारों से वसूल रहे हैं। हालात यह हैं कि नासिक से आने वाली प्याज महुली मंडी के कारोबारी डंप कर ले रहे हैं। ऐसे में महंगी प्याज खरीदने के बाद फुटकर विक्रेता भी मनमाना दाम वसूल रहे हैं।
अरहर की दाल 140 रुपये किलो बिक रही है। जबकि उड़द की दाल 110 रुपये किलो बिक रही है। यहां तक कि मटर की दाल भी आम लोगों के बस के बाहर हो चुकी है। मौजूदा समय में 40 रुपये किलो बिक रही है। जाहिर है कि गोदामों में डंप दाल नहीं बेंची जा रही है। दालों का दाम और बढ़ने का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल, जिला पूर्ति अधिकारी देवेंद्र सिंह ने कर्मचारी कल्याण निगम कानपुर से 39 मीट्रिक टन अरहर की दाल की डिमांड की है। ताकि जिले में दाल की कमी को दूर किया जा सके। थोक विक्रेता राजेंद्र अग्रवाल के मुताबिक बाहर से ही दाल की बहुत कम सप्लाई हो रही है। इससे समस्या पैदा हो रही है।