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डॉक्टर ने नहीं देखा, आक्सीजन के बिना निकल गया दम

Wed, 02 Sep 2015 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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जिले में हर्ट जैसी गंभीर रोगों के मुक्कमल इलाज की सुविधा प्राइवेट और सरकारी अस्पताल दोनों जगह नहीं है। अगर इसके मरीज आते हैं तो डॉक्टर उचित जांच के बिना दवाएं लिख देते हैं। बाद में जब मरीज की हालत बिगड़ती है तो उसका इलाज करने से हाथ खड़ा कर देते हैं। प्राइवेट वाले केस को सरकारी अस्पताल भेजते हैं। पता चलता है कि यहां पर आक्सीजन का सिलेंडर तो है मगर उसमें गैस नहीं रहती है। इस तरह की लापरवाही का खामियाजा रेलवे आरक्षण कार्यालय के कर्मी की मां को भुगतना पड़ा। उनको देखने से डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए। सरकारी में गई तो आक्सीजन की सुविधा नहीं मिली। समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। रेलकर्मी और उसका परिवार इस समय सदमे में हैं।
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इमामुल अंसारी प्रतापगढ़ आरक्षण कार्यालय के कर्मी हैं। रेलवे कॉलोनी में मां और परिवार के साथ रहते हैं। दो दिन पहले इनको किसी काम से लखनऊ जाना पड़ा। इसी बीच इनकी मां मैमुलनिशा (70) को बुखार की शिकायत हुई। परिजन इनको लेकर पुराना मालगोदाम स्थित एक प्राइवेट क्लीनिक पहुंचे। परिजनों के अनुसार डॉक्टर ने बिना जांच के मलेरिया बता दिया और उसकी दवा दे दी। दवा खाने के बाद मैमुन की हालत बिगड़ गई। उनको उल्टियां शुरू हो गईं। घरवाले घबरा गये। वे दोबारा से क्लीनिक पहुंचे। मगर डॉक्टर ने इलाज तो दूर की बात देखना तक उचित नहीं समझा। इमामुल अंसारी ने बताया कि घरवालों ने डॉक्टर से हार्ट के डॉक्टर को वहीं पर बुलाने की मिन्नत तक की। मगर डॉक्टर का दिल नहीं पसीजा।

वहां से निराश होकर लोग बलीपुर एक निजी अस्पताल पहुंचे। पता चला कि डॉक्टर बाहर हैं। पांच दिन बाद आयेंगे। वहां से जवाब मिलने के बाद परिजन शहर के दो चिरपरिचत हार्ट के डाक्टर के पास गए, मगर दुर्भाग्य से वे भी उपलब्ध नहीं हो सके। बाद में मैमुन को जिला अस्पताल में ले आये। यहां पर लापरवाही हुई। इमरजेंसी में देखने के बाद मैमुन को आईसीयू की बजाए जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया गया। अंसारी ने बताया कि मां की सांस उखडने लगी तो नर्स से डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा गया। उसने कहा कि उसके कहने पर नहीं आयेंगे। आप लोग खुद ही बुला लाइये। डॉक्टर आए देखा। एक बोतल ग्लूकोज और आक्सीजन लगाने को कहा। अंसारी का आरोप है कि सिलेेंडर लगाया गया, मगर उसमें आक्सीजन नहीं थी। ग्लूकोज चढने के कुछ देर बाद मैमुल की मौत हो गई। अंसारी ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा कि अगर समय से इलाज मिल गया होता तो शायद उसकी मां की जान बच जाती।
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