लाल सिग्नल तोड़ने के आरोप में दोषी पाए जाने पर रेलवे ने प्रतापगढ़ के ट्रेन ड्राइवर और असिस्टेंट के खिलाफ कार्रवाई की है। ड्राइवर की सजा के तौर पर ढाई साल पहले ही नौकरी से छुट्टी कर दी गई। असिस्टेंट का तीन साल का इंक्रीमेंट रोक दिया गया है। सजा की इस कार्रवाई को लेकर रेलकर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।
इसी साल 25 जनवरी को प्रतापगढ़ आ रहा लाइट इंजन (डबल इंजन) प्रतापगढ़-वाराणसी रेल मार्ग पर गौरा रेलवे स्टेशन के पास लाल सिग्नल को तोड़ते (ओवरशूट) हुए आगे बढ़ गया था। इस घटना की उच्चस्तरीय जांच हुई। जिसमें चालक रामप्रकाश और असिस्टेंट रंजय कुमार को दोषी पाया गया था। जांच अधिकारियों से मिली रिपोर्ट के आधार पर रेलवे ने चालक रामप्रकाश को ढाई साल पहले ही सेवा से बाहर कर दिया।
इनका रिटायरमेंट 31 जनवरी 2018 को होना था। दोषी मिलने पर उसके पहले ही रेलवे ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति थमा दी। घटना मेें असिस्टेंट रंजय को कम दोषी पाया गया। रेलवे ने उनकी सजा कम करते हुए तीन साल की वेतनवृद्धि (डब्ल्यूआईपी) रोक दी है। क्रू कंट्रोलर श्याम शंकर ने बताया कि गौरा रेलवे स्टेशन के पास लाइट इंजन लाल सिग्नल से आगे बढ़ आया था। जांच में चालक रामप्रकाश को दोषी पाया गया। जिसमें उनको विभाग ने समय से पहले ही रिटायर कर दिया। उनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। जबकि सहायक रंजय का तीन साल इंक्रीमेंट रोक दिया गया है।