सावन में बरसात नहीं होने से जिले में सूखे के हालात उत्पन्न हो गए हैं। सच्चाई का आलम ये है कि शासन ने पचास प्रतिशत पानी में कटौती कर दी है। इससे अधिकांश नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है।हैरत है कि इस पर भी कृषि विभाग धान की रोपाई को लेकर झूठा दावा कर रहा है। जुलाई और अगस्त माह में बरसात नहीं होने के बाद भी 90 प्रतिशत धान की रोपाई का आंकड़ा शासन को भेजा जा चुका है।
जिले में बरसात नहीं होने के कारण धान की रोपाई प्रभावित है। नहरों में पानी नहीं है। जिले की नहरों में मिलने वाले पानी में पचास प्रतिशत की कटौती की गई है। इससे अधिकांश नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। बरसात के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते वर्ष से भी कम वर्षा इस बार हुई है। पांच अगस्त 2015 तक 306.6 मिमी बरसात हुई है, जबकि वर्ष 2014 में पांच अगस्त तक 335.3 मिमी बरसात हुई थी और सबसे अच्छी वर्षा वर्ष 2013 में पांच अगस्त तक 688.8 मिमी हुई थी। इससे यह स्पष्ट है कि जिले में जब बरसात ही नहीं हुई, तो किसानों ने धान की रोपाई कैसे कर लिया। इसके बाद भी कृषि विभाग फर्जी रिपोर्ट भेजकर किसानों का गला घोंटना चाह रहा है। विभाग ने शासन को जो आंकड़ा भेजा है, उसमें अभी तक 90 प्रतिशत किसानों के धान की रोपाई करने की बात कही गई है। जबकि वास्तविकता तो यह है कि अभी चालीस प्रतिशत किसान धान की रोपाई नहीं कर सके हैं।