मन में आस्था और अटूट विश्वास था। मौका भी खास था। ललक थी दर्शन की। जलाभिषेक और शिर्वाचन की। भोर तीन बजे से ही सभी ‘नम: शिवाय ओम नम: शिवाय, हरहर भोले नम: शिवाय...’ का जप करते हुए शिवालयों की तरफ भागते रहे। हर कोई शिव दर्शन को आतुर रहा। गेरुआ वस्त्र पहने तमाम कांवड़िए पैदल ही बाबा के धाम की ओर भागते रहे। सुबह आठ बजे तक शिवालयों में हजारों भक्तों की भीड़ जमा हो गई। शिव के जयकारे से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। जो लोग शिवालयों में नहीं जा सके, उन्होंने घरों में ही बाबा भूतनाथ की पूजा की। सड़क से शिवालय तक सावन के प्रथम सोमवार को ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
लालगंज तहसील में स्थित बाबा घुइसरनाथधाम में रविवार की रात से ही कांवड़ियों का जमावड़ा हो गया था। वह सुबह होते ही भगवान शिव को जल चढ़ाकर लौटने लगे। तमाम कांवड़िए गंगा स्नान कर भोर में ही जल लेकर धाम की ओर भागते रहे। सुबह आठ बजे तक धाम परिसर भक्तों से खचाखच भर गया। भक्तों के जयकारे से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। गौर करने वाली बात यह रही कि दर्शनार्थियों में युवा युवतियों संग वृद्ध, महिलाएं व अधेड़ों की भी संख्या खूब रही। यही नजारा बेलखरनाथधाम में भी रहा। यहां भी श्रद्धालुओं संग कांवड़ियों का तांता लगा रहा। भोर से ही दर्शन के लिए घर से निकले भक्त रास्ते भर शिव का जयकारा लगाते रहे। भक्तों के जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय रहा। कुंडा क्षेत्र में स्थित हौदेश्वरनाथधाम में भी सावन के प्रथम सोमवार को भक्तों की खासी भीड़ रही। मानधाता के भयहरणधाम में भी यही हाल रहा। मोहनगंज में बालेश्वरनाथ धाम भी भक्तों से पटा रहा। मंदिर परिसर में बैठ कर तमाम लोग शिव स्तुति किए। भोले बाबा को मनाने के लिए भक्तजन भांग, धतूर, फूल, बिल्व पत्र आदि चढ़ाते रहे। ऐसे भी भक्त नजर आए जिन्होंने अवघड़दानी को गांजा चढ़ाकर पूजा की।