जिले में कन्या सुमंगला योजना की सफलता में अपात्र बाधक बन गए हैं। आनलाइन आवेदन करने वालों में अपात्रों की संख्या अधिक होने से पात्रों की जांच करना भारी पड़ रहा है। जिले में 30,304 आवेदन पत्रों के सत्यापन में सिर्फ 16,236 आवेदक अपात्र मिले हैं, पात्र मिले 14,068 बालिकाओं के खाते में धनराशि भेजी जा चुकी है।
जिले में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में अपात्रों की संख्या इतनी बढ़ गई है, कि पात्रों को खोजने में अफसरों को पसीना आ रहा है। दरअसल में यह योजना दो बच्चों और तीन लाख रुपये वार्षिक आमदनी वाले परिवारों की बालिकाओं के लिए है। मगर उन परिवारों ने भी आवेदन कर दिया है, जिनके पास टैक्टर और चार पहिया वाहन हैं।
इस योजना का लाभ पाने के लिए जिले के 55,436 परिवारों ने आनलाइन आवेदन किया है। विभागीय अफसरों ने मानक की कसौटी पर कसने के लिए जब कर्मचारियों को गांव-गांव भेजा, तो खुलासा हुआ कि अधिकांश अपात्रों ने आवेदन कर रखा है।
जिला प्रशासन ने अभी तक 30,304 आवेदन पत्रों के सत्यापन कराया, जिसमें 16,236 आवेदक अपात्र और14,068 बालिकाएं पात्र मिली। हालांकि इन बालिकाओं के खाते में पहली किस्त का भुगतान कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों ने खंड विकास अधिकारियों से सत्यापन रिपोर्ट तलब की है।
स्कूलों पर बढ़ा दबाव, तो अपात्रों का करा दिया आवेदन
डीआईओएस और बीएसए पर आवेदन के लिए दबाव बढ़ने पर स्कूलों के प्रिंसिपलों ने अपात्रों का आवेदन कराकर भारी भरकम संख्या दिखाकर अपना पल्ला तो झाड़ लिया, मगर अब अपात्रों को किनारे लगाने में अफसरों को पसीना छूट रहा है।
प्रदेश में चौथे स्थान पर पहुंचा बेल्हा
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में बेल्हा प्रदेश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। तीन दिन पहले हुए वीडियो कांफ्रे सिंग में प्रमुख सचिव की ओर से जानकारी मिलने पर अफसरों ने राहत की सांस ली है। हालांकि इस दिशा में अभी प्रयास जारी है।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना गरीब परिवार की बेटियों के लालन-पालन और पढ़ाई के लिए है। सत्यापन में जो भी पात्र मिल रहे हैं, उनके खाते में आनलाइन धनराशि भेजी जा रही है। विजय कुमार शुक्ला, प्रभारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी