चिलबिला ओवरब्रिज निर्माण के पूरा होने में रोड़ा अटका रहे वन विभाग के 135 पेड़ों के काटने के लिए एनएच को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वन विभाग ने एक पेड़ के बदले दस पेड़ लगाने और उसके रख-रखाव की कीमत का प्रस्ताव एनएच के सामने रखा है। वन विभाग की अन्य शर्तों पर अभी चर्चा होनी बाकी है।
चिलबिला ओवरब्रिज का निर्माण पहले फेज में 170 पेड़ों की कुर्बानी के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। एनएच को इन पेड़ों की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। वन और पर्यावरण मंत्रालय की शर्तों को पूरा करने में एनएच को लाखों रुपये खर्च करने पड़े हैं। मगर अफसोस इतना सारा धन खर्च होने के बाद भी पुल का निर्माण अधूरा ही है। एनएच के नए प्रस्ताव में पता चला है कि पुल के रास्ते में 135 नए पेड़ रोड़ा बन रहे हैं। अब इनकी कटाई के लिए एनएच भागदौड़ कर रहा है। इसकी फाइल वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक के पास लखनऊ में पड़ी है। वन संरक्षक के बाद फाइल पर्यावरण और वन मंत्रालय को भेजी जाएगी। वन विभाग की नियमावली के अनुसार एक पेड़ के बदले दस पेड़ की कीमत चुकाने के बाद ही पेड़ को काटने की अनुमति दी जाती है।
यही शर्त एनएच के सामने भी रखी गई है। वह जितने भी पेड़ कटवाएगा, उसकी दस गुनी कीमत का भुगतान उसको करना पड़ेगा। यह तो प्रमुख शर्त है। इसके अलावा भी और कई शर्तें हैं। जिसको एनएच को पूरा करना होगा। सभी शर्तों को मानने के बाद ही वन विभाग पेड़ों के काटने की अनुमति देगा। फिलहाल कितनी कीमत तय होगी, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक फाइल लखनऊ से नहीं आ जाती कुछ कहना मुश्किल है। इस बारे में डीएफओ वाईपी शुक्ला का कहना है कि एक पेड़ के बदले दस पेड़ की कीमत का प्रावधान है। यह कीमत कितनी होगी, यह नहीं बता सकता। फाइल आने के बाद भी कुछ बता पाऊंगा।