धुंई व गोविंदपुर गांव के लोगों के बीच मामूली विवाद को सियासी दलों ने तूल पकड़ा दिया है। वोटबैंक की सियायत के चक्कर में गोविंदपुर गांव इन दिनों सियासी अखाड़ा बन गया है।
बसपा को छोड़कर अब तक सभी सियासी दलों के नेता गांव पहुंच चुके हैं। उधर, पुलिस ने आधा दर्जन नेताओं समेत 500 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट भी दर्ज की है। नेताओं की दखल से मामला उलझता जा रहा है। पखवारे भर बाद भी दोनों पक्षों के बीच तनातनी बरकरार है।
पट्टी क्षेत्र के धुंई गांव व गोविंदपुर गांव के बीच की दूरी लगभग एक किमी है। दोनों गांवों के लोगों के बीच पहले कभी कोई ऐसी घटना नहीं हुई, जिससे गांव का आपसी सौहार्द्र बिगड़ा हो।
छिटपुट विवाद को दोनों गांवों के लोग आपस में ही पंचायत करके सुलझा लिया करते थे। 22 मई को भी धुंई और गोविंदपुर गांव के लोगों के बीच मामूली विवाद ही हुआ था। गांव के बुद्धिजीवियों ने दोनों पक्षों के बीच पंचायत कराकर मामला लगभग सुलझा दिया था। मगर इस बीच एक पक्ष के लोगों को मारने-पीटने की खबर पर फिर से दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
घटनाक्रम की जानकारी होने पर सियासी दल भी राजनीति साधने लगे। गोविंदपुर गांव में सियासी दलों के नेताओं का आना शुरू हो गया। सबसे पहले कांग्रेस नेता राम सिंह पटेल ने गोविंदपुर गांव पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की। इसके बाद से सियासी दलों के नेताओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। सपा नेेता बाल कुमार ने भी गोविंदपुर गांव आकर पीड़ित पक्ष से मुलाकात कर निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
सपा जिलाध्यक्ष छविनाथ यादव भी गांव पहुंचे। इससे गांव में सियासी सरगर्मी बढ़ गई। इसके बाद पूर्वमंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, ओमप्रकाश राजभर, कृष्णा पटेल ने भी गोविंदपुर गांव का रुख किया। मगर उन्हें गांव जाने से रोक दिया गया। लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन न करने सहित अन्य धारों में इन सभी के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
इधर, शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल भी सैकड़ों समर्थकों के साथ गोविंदपुर गांव पहुंचीं। यहां पीड़ित पक्ष की महिलाओं से मुलाकात की। पुलिस प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। एसपी को अनुभवहीन बताते हुए हटाए जाने की मांग की। गोविंदपुर गांव में बसपा को छोड़कर अभी तक सारी राजनैतिक पार्टियां पहुंच चुकी हैं।
इससे गांव का माहौल और बिगड़ गया है। जातीय तूल देने से दोनों पक्षों में तनातनी का माहौल कायम है। पखवारे भर बाद भी गांव में विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक 500 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।