संपादित- दुउ लाख का करब...बिटिया की जिंदगी कैसे बीती
हादसे में टेंपो चालक संतोष कुमार और उसके माता-पिता भी शामिल थे। दो लाख की सरकारी मदद मिलने की बात सुन संतोष की पत्नी बोली- दुउ लाख लाख रुपिया का करब, हमार औ बिटिया के जिंदगी अब कैसे बीती। मंगलवार को करीब दो बजे घर से एक साथ तीन अर्थियां उठीं तो माहौल भावुक हो गया।
जेठवारा के भैरोपुर नौबस्ता नारायनपुर के रहने वाले राधेश्याम गौतम बसपा के कार्यकर्ता थे। उनका बेटा मनोज घर पर रहकर काम-काज करता है। जबकि संतोष टेंपो चलाकर परिवार पालता था। सोमवार को हुए हादसे में संतोष सतीश ही नहीं उसके पिता राधेश्याम और मां अंजू की भी मौत हो गई।
संतोष का शव रात में ही घर पहुंचाया गया था। पति का शव देखते ही पत्नी नेहा बेसुध हो गई थी। उसकी मासूम बच्ची कभी रोने लगती तो कभी आने-जाने वालों को देखती। उसे निहारे बिना कोई वहां से नहीं लौटता।
मंगलवार की सुबह करीब दस बजे प्रयागराज से संतोष के पिता राधेश्याम व मां अंजू का शव घर पहुंचा। भाई के साथ माता-पिता का शव देख मनोज रोते हुए बेहोश हो गया। होश आया तो बोला कि भाई ही सबकी जरूरतों का ध्यान रखता था। संतोष की ससुराल से ससुर राममूर्ति, सास मीना, साला विकास, हिमांशू व कोमल पहुंचे थे। परिजनों को देखते ही बदहवास नेहा अपने पिता से लिपटकर रोने लगी।
का भइया अब बाबू माई अउर संतोष न मिलिहयं
टेंपो चालक मृतक संतोष की दो बहनें नीलम व पूनम बड़े भाई मनोज को पकड़कर रोती-बिलखती रहीं। बोली कि का भइया अब बाबू-माई अउर सतीश कभौ न मिलिहयं। यह सुन हर किसी की आंखें भर आईं। अब मनोज के कंधे पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई है।