लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर भाजपा के पक्ष में 2014 के मुकाबले सात प्रतिशत अधिक मतदाताओं ने मतदान किया। बसपा-सपा गठबंधन का मतदान प्रतिशत घट गया। कांग्रेस को हर विधानसभा में झटका लगा। जबकि पिछली बार भाजपा ने गठबंधन में अद को सीट दी थी। अद प्रत्याशी ने भाजपा के समर्थन से 40 फीसदी वोट हासिल किया था। इस बार भाजपा प्रत्याशी को 7.7 फीसदी अधिक मत मिले हैं।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कुल 52.02 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार मतदान में कुल 9,14,655 मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। 53. 38 फीसदी मतदान हुआ। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अद प्रत्याशी हरिवंश सिंह को 40 फीसदी मत मिले थे। जबकि इस बार भाजपा प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता को 47.7 फीसदी मतदाताओं ने अपना मत दिया है।
2014 के मुकबाले 7.7 फीसदी ज्यादा मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशी को पसंद किया। सबसे बुरा हाल कांग्रेस प्रत्याशी का रहा। वर्ष 2014 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह को 14 प्रतिशत मत मिले थे। इस बार यह आंकड़ा घटकर 8.43 प्रतिशत पर आ गया। सपा प्रत्याशी प्रमोद सिंह पटेल को पिछले चुनाव में 12.56 फीसदी वोट मिले थे।
बसपा प्रत्याशी आसिफ निजामुद्दीन को 23.48 प्रतिशत मत मिले थे। हालांकि इस बार सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद बसपा प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी को 34.83 फीसदी मत ही मिले। जनसत्ता दल के प्रत्याशी अक्षय प्रताप सिंह को 5.13 प्रतिशत मत मिले। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को सभी विधानसभाओं में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
यहां तक कि कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी के गढ़ रामपुर खास में भी भाजपा के पक्ष में मतदाताओं ने वोटिंग की। जिससे कांग्रेस का गढ़ भी हिलता नजर आया। बसपा-सपा गठबंधन के प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी को केवल पट्टी विधानसभा में ही बढ़त मिली।
जबकि अन्य चार विधानसभाओं में हार का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक भाजपा के पक्ष में विश्वनाथगंज, सदर, रामपुर खास व रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग हुई।