गर्मी की शुरुआत में ही बिजली कटौती ने रात की नींद और दिन का चैन छीनना शुरू कर दिया है। रात को दो घंटे की कटौती जनजीवन पर भारी पड़ रही है। उस पर भी लोकल फाल्ट और मनमानी आपूर्ति ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। लोग रात को पूरी नींद सो नहीं पा रहे हैं। इसके कारण दिनचर्या भी अस्त-व्यस्त है। इससे सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शहर में ठंड के दौरान बिजली कटौती का रोस्टर अलग था। अब रात 11 बजे से 1 बजे तक की कटौती चल रही है। कभी कभार तो दस बजे ही बिजली कट जाती है और बारह बजे आती है तो कभी साढे़ ग्यारह बजे जाती है और डेढ़ बजे ही आती है। इस कटौती से शहरी परेशान हो उठे है।
दिन में भी अलग-अलग समय पर कटौती की जाती है। रोस्टर कटौती का समय भी निर्धारित नहीं है। कभी भी बिजली दिन में जा सकती है और कभी भी आ सकती है। दिन की कटौती तो अभी लोग किसी तरह बर्दाश्त कर ले रहे हैं लेकिन रात की कटौती लोगाें की नींद उड़ा दे रही है। इसके अलावा हर दिन लोकल फाल्ट और इमरजेंसी कटौती के नाम पर दिन और रात को रोस्टर से काफी बिजली काटी जा रही है। गर्मी की शुरुआत से ही लोगाें को दिक्कत होने लगी है। मच्छराें का हमला कुछ हद तक पंखा कम करता है लेकिन बिजली जाते ही बच्चे, बडे़ और बूढ़े जग जाते हैं। एक बार नींद बाधित होने के बाद बिजली आने पर भी लोग ठीक से सो नहीं पाते। यदि अभी से यह हाल है तो मई व जून में क्या हाल होगा।
नींद पूरी न होने से होती है भारी परेशानी
नींद पूरी न होने से व्यक्ति को खासी परेशानी होती है। फिजीशियन डा. पीएस मिश्रा के अनुसार नींद पूरी न होने से व्यक्ति की मानसिक स्थिति कमजोर हो जाती है। चिड़चिड़ापन आ जाता है और वह काम के प्रति एकाग्र नहीं रह पाता। अगर व्यक्ति पहले से बीमार है और वह पूरी नींद नहीं ले पाता तो उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं आ सकता। उम्र 60 साल से पार होने पर तो नींद कम आ सकती है लेकिन युवा व स्वस्थ व्यक्ति को कम से कम छह घंटे गहरी नींद में सोना जरूरी है।