प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में विभाग के मानक को ताक पर रखकर अध्यापकों की तैनाती की गई है। प्राइमरी स्कूल रूपापुर और कादीपुर ऐसे हैं, जहां बच्चों की संख्या से अधिक अध्यापकों की तैनाती की गई है। हालांकि यह आंकड़ा मई माह का है।
कुंडा, कालाकांकर, बिहार, बाबागंज के स्कूलों में तैनाती से जहां अध्यापक भागते हैं, वहीं सदर विकास खंड में तैनाती के लिए मारामारी होती है। सदर विकास खंड के अधिकांश स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षा का अधिकार (आरटीई) का उल्लंघन कर बच्चों की संख्या पर्याप्त न होने के बाद भी अधिक शिक्षकों की तैनाती की गई है। इसमें कई अध्यापिकाएं ऐसी हैं, जो आईएएस और पीसीएस की बेटी और पत्नी हैं। इससे विभाग के अधिकारी भी इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाते हैं। प्राइमरी स्कूल कादीपुर में नौ टीचर और छह बच्चे, जबकि रूपापुर प्राइमरी और मिडिल में आठ-आठ टीचर और सात-सात बच्चे हैं। इसके बाद भी इन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती है। फिलहाल जब कभी अधिकारी स्कूल का निरीक्षण करते हैं, तो दो शिक्षिकाएं चाइल्ड केयर लीव पर होती हैं। दरअसल, यह शिक्षिकाएं स्कूल नहीं जाती हैं और एक बार स्वीकृत होने वाली छुट्टी बार-बार प्रयोग होती रहती है। यही वजह है कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है।
यह है मानक
प्राइमरी स्कूल 30 बच्चों पर एक शिक्षक।
जूनियर स्कूल 35 बच्चों पर एक शिक्षक।
जिले के सभी शिक्षकों को दो दिन पहले स्कूलों की साफ-सफाई करने के लिए स्कूल खोलने को कहा गया था। जिन स्कूलों में अतिक्रमण है, जहां साफ-सफाई नहीं हुई है, उन शिक्षकों से स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। अतिक्रमण हटवाने के साथ ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था का माहौल तैयार किया जाएगा। मॉडल स्कूलों में जल्द ही टीचरों की तैनाती की जाएगी। पेयजल, शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ग्राम पंचायतों की मदद ली जा रही है।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।