विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को जनसभाओं तक पहुंचाने के लिए मनोरंजन के भी भरपूर इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के करीब और बड़े बाजारों में आर्केस्ट्रा का आयोजन हो रहा है और देहात के बाजारों में सभा से पहले लोगों को सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए भीड़ जुटाई जा रही है।
चुनावों में हमेशा ही लोकधुनें सुनाई पड़ती थीं। संगीत पार्टी बाकायदा प्रचार वाहन में निकलती थी। हारमोनियम की तान और ढोलक की थाप पर दल और नेताओं के गुणगान किए जाते थे। समय बदलने के साथ ही लोकधुन प्रचार से गायब हो गई है। मतदाता किसी हाल में प्रत्याशी का इंतजार नहीं करना चाह रहा है। गर्मी के कारण जनसभाओं में भीड़ का अभाव देखते हुए नया तरीका निकाला गया है। लोकधुन के दिन लद गए। अब भीड़ को आकर्षित करने के लिए रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
ेसदर, विश्वनाथगंज, रानीगंज विधानसभा में प्रत्याशियों के पहुंचने तक कलाकारों के जरिए पब्लिक को रोका रखा गया। विलंब से पहुंचे प्रत्याशी लोगों से क्षमायाचना कर अपने पक्ष में माहौल बनाते दिखे लेकिन भीड़ नेता के भाषण के दौरान खिसकने लगती दिखी। ग्रामीणांचल के बाजारों में आल्हा और बिरहा के साथ भोजपुरी कलाकारों को बुलाया जा रहा है। जो बड़े नेताओं के आगमन के पहले दूर दराज से आई भीड़ को रोकने व मनोरंजन के लिए कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहते हैं। पहले चुनाव प्रचार के बदले तरीके में प्रत्याशियों ने भी अब लोगों की भीड़ जुटाने के लिए नायाब तरीका निकाल लिया है।