प्रधानी के चुनाव में दारू और मुर्गा बांटने वाले प्रधान अब कमाई का जरिया खोज रहे हैं। ब्लॉक और विकास भवन का चक्कर लगाने वाले यह प्रधान बारीकी से योजनाओं की जानकारी करने के बाद आमदनी का तरीका पूछ रहे हैं। कुछ प्रधान तो ऐसे हैं, जो गांव को लोहिया गांव घोषित कराने के लिए जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर सुबह-शाम हाजिरी लगा रहे हैं।
गांव के मुुखिया की कमान संभालने वाले प्रधानों की नजर गांव के अब विकास के लिए आने वाले बजट पर टिक गई है। गांव में किस-किस विभाग से क्या-क्या योजनाएं संचालित हैं और इसमें परदे के पीछे से कमाई कैसे हो सकती है, वे इसका तौर-तरीका खोज रहे हैं। कुछ प्रधान ऐसे हैं जो राजवित्त आयोग, चौदहवां वित्त आयोग, मनरेगा सहित विभिन्न खातों में आने वाली धनराशि के बारे में ब्लॉक और विकास भवन पहुंचकर जानकारी जुटा रहे हैं।
ब्लॉक पर दिनभर जमा रहने वाले प्रधान ग्राम पंचायत अधिकारियों और ब्लॉक कर्मियों से पहले तो योजनाओं के विषय में जानकारी करते हैं, उसके बाद कमाई का जिक्र करना नहीं भूलते हैं। लोहिया समग्र गांवों में हो रहे विकास कार्यों को देखकर प्रधानों की नजर अपने गांव को भी घोषित कराने पर टिक गई है। वह जनप्रतिनिधियों के घर सुबह-शाम दस्तक देकर पैरवी करने में जुट गए हैं। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि उनके कार्यालय में प्रतिदिन प्रधानों की भीड़ उमड़ रही है। उसमें से अधिकांश प्रधान सिर्फ यह पूछने आते हैं कि चौदहवां वित्त आयोग की धनराशि कब खाते में पहुंच रही है।