लोकल गोताखोरों को सुविधा मुहैया कराएगी पुलिस
नदियों में डूबे लोगों को बचाने में मिलेगी कामयाबी
सिपाही से रहेगा तालमेल, कोतवाली व थानों पर रहगी गोताखोरी की सूची
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। सई नदी समेत दूसरी नदियों में नहाते हुए लोग गहरे पानी में समा जाते हैं। कई दिनों बाद लाश मिलती है। संसाधन के अभाव में स्थानीय गोताखोर डूबने वाले की तलाश नहीं कर पाते। इसके चलते बाहर से गोताखोरों को बुलाना पड़ता है। इस बीच नदी में डूबा व्यक्ति दूर तक बह जाता है। अब स्थानीय गोताखोरों का ब्यौरा कोतवाली व थानों पर मौजूद रहेगा। उन्हें जाल, रस्सा भी प्रशासन मुहैया कराएगा। हल्का सिपाही के ऊपर जिम्मेदारी होगी कि घटना के बाद तत्काल वह गोताखोर को लेकर पहुंचे। ताकि राहत कार्य प्रारंभ हो सके।
जिले से गंगा नदी, सई नदी, बकुलाही व चमरौधा नदी बहती है। इसके अलावा शारदा सहायक नहर भी जौनपुर में जाकर मिलती है। आए दिन नदियों में नहाने के दौरान लोग गहरे पानी में डूब जाते हैं। बेल्हा देवी मंदिर के करीब, घुइसरनाथ, बेलखरनाथ धाम घाट, मानिकपुर घाट पर भी श्रद्धालु स्नान करने के दौरान नदियों में समा जाते हैं। तत्काल मदद न मिल पाने के कारण उन लोगों की जान चली जाती है। नदी में डूबने से हो रही लोगों की मौतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने नदी के किनारे रहने वाले गोताखोरों का पूरा ब्यौरा मोबाइल नंबर सहित कोतवाली व थानों में दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा गोताखोरों के संपर्क में हल्का सिपाही बराबर रहेंगे। घटना के बाद स्थानीय गोताखोरों को रस्सा व जाल की जरूरत पड़ती है। सिपाही अपने स्तर से उसकी व्यवस्था कराएंगे। जैसे ही ऐसी किसी घटना की जानकारी मिलती है। तत्काल उस इलाके का सिपाही गोताखोर को लेकर मौके पर पहुुंचेगा।
नदियों में डूबने वाले लोगों को बचाने के लिए स्थानीय गोताखोरों को सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। कोतवाली व थानों पर सभी को पूरा ब्यौरा दर्ज रहेगा। ताकि जरूरत पडऩे पर हल्का सिपाही तत्काल उसे लेकर घटनास्थल पर मदद के लिए पहुंच सके। अभिषेक सिंह, एसपी