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चिटफंड संचालक को पुलिस ने भेजा जेल

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चिटफंड संचालक को पुलिस ने भेजा जेल
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नौ दिन बाद हिरासत में लिए गए मकान मालिक के बेटे को छोड़ा
पूछताछ में फिर संचालक ने बदला नाम, दूसरे जिले के 10 लोगों के नाम भी आए सामने
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। चिटफंड कंपनी संचालक को क्राइम ब्रांच ने नौ दिन तक छानबीन के बाद जेल भेज दिया। मकान मालिक के बेटे को पुलिस ने छोड़ दिया। पूछताछ के दौरान पकड़े गए संचालक ने फिर अपना नाम बदल दिया। उसने फ्राड गैंग के 10 सदस्यों के नाम पुलिस को बताए हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
नगर कोतवाली के करनपुर करमचंदा में सालिकराम जायसवाल के मकान में मनी स्पाट म्यूचुअल चिटफंड कंपनी ने 40 दिन के भीतर करीब 400 ग्राहक बनाए। लोगों के करीब 40 लाख से अधिक रुपये कंपनी में जमा कराए। किसी को कर्ज देने के लिए तो किसी की जमा धनराशि पांच साल में दोगुना करने का झांसा दिया था। कंपनी के लोगों ने कर्ज लेने वाले लोगों को प्रक्रिया पूरी करने पर 13 सितंबर के दिन रुपये खाते में भेजने का भरोसा दिलाया था। उसी रात कंपनी का सारा सामान समेटकर लोग भागने लगे। लोगों को भनक लग गई और कंपनी में रुपया जमा करने वालों ने रात में ही कंपनी के संचालक को बंधक बना लिया। दूसरे दिन पुलिस उसे व मकान मालिक आशीष जायसवाल को हिरासत में लेकर कोतवाली गई। 122 लोगों ने पुलिस को तहरीर दी। एसपी अभिषेक सिंह के निर्देश पर प्रकरण की विवेचना क्राइम ब्रांच निरीक्षक देवेंद्र ने शुरू कर दी। कंपनी का सामान कब्जे में लेने के बाद रविवार को उनकी पूछताछ पूरी हुई। कल तक पुलिस को अपना नाम विपिन सिंह निवासी हरदोई बताकर गुमराह करने वाला संचालक क्राइम ब्रांच की पूछताछ में टूट गया। उसने पुलिस को अपना नाम अजीत सिंह निवासी टीकर थाना अहिरौली जनपद कुशीनगर बताया। क्राइम ब्रांच निरीक्षक देवेंद्र सिंह ने बताया कि मकान मालिक सालिकराम के बेटे आशीष जायसवाल को इस शर्त पर छोड़ा गया है कि कंपनी में काम करने वाले लोगों की गिरफ्तारी में मदद करेगा। अजीत को जेल भेजा जा रहा है। अभी तक अलग-अलग जनपदों के दस लोगों का नाम प्रकाश में आया है। हालांकि केवल नाम व जिले का ही पता चल रहा है। पूछताछ में अजीत ने कंपनी के निदेशक बने राकेश शर्मा, संजय, अशोक , जीतेंद्र समेत अन्य का नाम सामने आया है। उनकी तलाश शुरू कर दी गई है।
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जेल के बजाय उसकी मदद से साथियों तक पहुंचने की कर रहे थे लोग मांग
आखिरकार वही हुआ, जिसका कंपनी में रुपया जमा करने वालों का भय था। पहले दिन से ही लोग मांग कर रहे थे कि रुपये जमा करने वाले कंपनी के दूसरे लोगों की तलाश में पकड़े गए अजीत सिंह की मदद लेनी चाहिए। उसे साथ लेकर उन लोगों की तलाश कर लोगों के रुपये लौटाने की पहल होनी चाहिए। कंपनी में रुपये जमा करने वाले पहले दिन से मांग कर रहे थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। नौ दिन बाद पुलिस ंअजीत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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डूब गई मेहनत की कमाई
लालच में आकर चिटफंड कंपनी के बारे में बिना कुछ छानबीन किए लाखों रुपये जमा करने वाले खाताधारकों की मेहनत की कमाई पानी में डूब गई। लोगों की मानें तो करीब 400 लोगों ने कंपनी में लेनदेन के लिए खाता खुलवाया था। इस दौरान कम ज्यादा कर लोगों ने तकरीबन 40 लाख रुपये भी जमा किए थे। ऐसे लोगों को अब बहुत पछतावा हो रहा है। रुपये जमा करने वाले लोगों से भी क्राइम ब्रांच ने पूछताछ की।
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